पुरातात्विक धरोहर रघुनाथ राव महल में अम्रुत योजना के अंतर्गत बन रहे पार्क का काम पैसे की कमी के कारण ठप पड़ गया है। अब शासन से पैसा आने का इंतजार किया जा रहा है। पैसे की लेटलतीफी का आलम यह है कि पार्क का निर्माण अगस्त में पूरा होना था लेकिन अक्तूबर समाप्त होने वाला है और अब तक शासन से पैसा जारी नहीं हो सका है।
अटल मिशन फॉर रिजूवेशन एंड अरबन ट्रांसफॉरमेशन (अम्रुत) के अंतर्गत नई बस्ती स्थित रघुनाथ राव महल के खंडहर में पार्क का निर्माण कराने का फैसला लिया गया। पुरातत्व विभाग ने इसके लिए अनापत्ति जारी की, इसके बाद 1.72 करोड़ रुपये का टेंडर होने के बाद इसका काम शुरू हुआ। तय किया गया था कि अगस्त में पार्क का काम पूरा हो जाएगा लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हो सका है। इसकी वजह पैसे की कमी बताई जा रही है। शासन ने इसके लिए अब तक 25 लाख रुपये ही जारी किए हैं। यह स्थिति तब है, जब अम्रुत योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वरीयताओं में शामिल है। पैसा खत्म होने के बाद से नगर निगम लगातार शासन से पत्राचार कर रहा है, लेकिन अभी तक पैसा जारी नहीं हो सका है।
पार्क में खंडहर हो चुके महल की पुरानी दीवारों से दो मीटर की दूरी पर फुटपाथ बनाया जा रहा है। पार्क में गुलाब बाड़ी, फव्वारा और फूलों की क्यारियां बनाई जाएंगी, झूले और आकर्षक लाइटिंग होगी। पार्क का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद पुरातत्व विभाग इसकी दीवारों को संरक्षित करेगा, ताकि महल को आकर्षण का केंद्र बनाया जा सके और इसे देखने के लिए सैलानी आ सकें। महल की जो दीवारें गिर गई हैं, उनका फिर से निर्माण कराया जाएगा और छतों का भी निर्माण कराया जाएगा। यह हूबहू पुरानी दीवारों की तरह बनाई जाएंगी।
18वीं शताब्दी में हुआ था महल का निर्माण
मराठा सूबेदार रघुनाथ राव ने 18वीं शताब्दी में इस महल का निर्माण कराया था। यह महल शहर की घनी आबादी के बीचों बीच नई बस्ती में स्थित है। इस महल की खासियत थी कि यह बुंदेली, मराठी और यूरोपियन शैली में बना था। खपरैलनुमा छत का निर्माण इस महल में पहली बार किया गया था। महल के चारों ओर सुरक्षा दीवार थी, जो अब अतिक्रमण के कारण नष्ट हो गई है। महल राज्य पुरातत्व विभाग की देखरेख में है। महल के अंदर अवैध कब्जे हैं और गंदगी की भरमार है। लेकिन, महल में पार्क बन जाने से गंदगी समाप्त हो जाएगी और आसपास का वातावरण हरा भरा हो जाएगा। यहां पर घूमने वाले आएंगे, जिससे माहौल साफ-सुथरा नजर आने लगेगा।
डॉ. वृंदावन लाल वर्मा पार्क में भी पैसे की कमी
किले की तलहटी में स्थित उपन्यास सम्राट डॉ. वृंदावन लाल वर्मा की स्मृति में बना पार्क झांसी विकास प्राधिकरण ने 2006 में बुंदेलखंड विकास पैकेज से 91.71 लाख रुपये की राशि से बनवाया था, लेकिन निर्माण से लेकर आज तक पार्क गुलजार नहीं हो सका है। इसकी वजह पार्क की बाउंड्रीवाल को माना गया, क्योंकि अन्य पार्कों की बाउंड्रीवाल खुली है, जबकि इसकी बाउंड्रीवाल बंद है। पार्क का रखरखाव न होना भी सैलानियों की उपेक्षा की एक वजह रहा। बाद में जेडीए ने नगर निगम को पार्क हस्तांतरित कर दिया। अब पार्क का निर्माण भी अम्रुत के अंतर्गत हो रहा है। इस पर तीन करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन शासन ने अब तक 1 करोड़ 20 लाख रुपये ही जारी किए हैं। इस कारण काम की रफ्तार धीमी हो गई है। यदि जल्द ही पैसा जारी नहीं हो सका तो काम बंद हो जाएगा।
जल्द जारी होगा पैसा
दोनों पार्कों के लिए केंद्र सरकार ने दूसरी किस्त का पैसा जारी कर दिया है। अब शासन से स्वीकृति का इंतजार किया जा रहा है। शासन से पत्राचार किया गया है, जल्द ही पैसा जारी हो जाएगा। जहां तक काम बंद होने की बात है, तो दशहरा के कारण मजदूर छुट्टी पर गांव गए हैं। उनके वापस आते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
- एके शर्मा, अधिशासी अभियंता, नगर निगम