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राजनीति में महिलाओं की भागीदारी जरूरी

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aprajita 100 miliun smiles - फोटो : demo
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अमर उजाला के नारी गरिमा के साझा संकल्प ‘अपराजिता 100 मिलियन स्माइल’ के तहत सोमवार को पनारी स्थित पहलवान गुरुदीन महाविद्यालय में व्याख्यानमाला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें छात्राओं ने ‘राजनीति में महिलाओं की भूमिका’ विषय पर अपने विचार रखे। इस दौरान महिलाओं ने बताया कि जिस प्रकार एक परिवार महिला के बिना अधूरा होता है, उसी प्रकार राजनीति भी महिलाओं की सहभागिता बिना अधूरी है। महिलाओं को जब भी राजनीति में मौका मिला है, उन्होंने अपनी प्रतिभा को लोहा मनवाया है। यही कारण है कि रक्षा, विदेश जैसे केंद्रीय मंत्रालयों को महिलाएं संभाल रही हैं। प्रतियोगिता में भावना रायकवार ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
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व्याख्यानमाला में बीए की छात्रा रश्मि राजपूत ने कहा कि राजनीति राष्ट्र के विकास में अहम किरदार निभाती है। इसमें महिलाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण है। पुराने समय में भी महिलाओं को नेतृत्व करने का मौका मिला है, इसका उदाहरण दिल्ली में रजिया सुल्तान का शासन देखा जा सकता है।
छात्रा प्रियंका सिंह ने बताया कि महिलाएं पुरुषों से हर क्षेत्र में आगे हैं। भारत की आजादी से लेकर वर्तमान समय तक महिलाएं प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से अपना योगदान देती आ रही हैं। कस्तूरबा गांधी जहां स्वतंत्रता आंदोलन में अप्रत्यक्ष रूप से महात्मा गांधी के लिए प्रेरणा बनीं, वहीं रानी लक्ष्मीबाई स्वयं रण में कूदकर अपना जौहर दिखा गईं। छात्रा अंजली झा ने बताया कि महिलाओं में राजनैतिक चेतना का तेजी से विकास हो रहा है, वहीं इतिहास भी महिलाओं के योगदान से भरा हुआ है। छात्रा कीर्ति झा ने बताया कि महिलाएं यदि पारिवारिक जिम्मेदारियां उठा सकती हैं तो राजनीति के क्षेत्र में क्यों सफल नहीं हो सकती हैं। छात्रा भावना रायकवार ने बताया कि प्राचीन काल से ही पुरुष प्रधान समाज होने के कारण महिलाओं को पीछे रखा गया। इसका कारण यह था कि पुरुषों को डर था कि कहीं महिलाओं को आगे लाने से वह पुरुषों को पछाड़ न दें। देश की प्रथम प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, राज्यपाल सरोजनी नायडू समेत कई महिलाओं ने राजनीति के इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करवाया है। प्राचार्य विभा ताम्रकार ने बताया कि महिला किसी क्षेत्र में भी पराजित नहीं हो सकती है। युद्ध, राजनीति व परिवार हर मोड़ पर महिलाओं ने अपनी छाप छोड़ी है। प्रतीक्षा पाठक ने बताया कि ग्रामीण महिलाओं की सोच होती है कि वह कुछ नहीं कर सकतीं। वहीं पुरुष महिलाओं के आगे आने से अपनी भूमिका कम होने से डरते हैं। सोनिया विश्वकर्मा ने बताया कि महिलाएं किसी क्षेत्र में कमजोर नहीं हैं। वह परिवार और राजनीति दोनो क्षेत्रों में जिम्मेदारियां निभा सकती हैं। प्राचार्य आशीष अग्रवाल ने बताया कि किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए मूलभूत जानकारियां होना आवश्यक है। बिना बेसिक जानकारी के असफलता मिलती है। प्राचार्य नसीम खान ने बताया कि आधुनिक काल में महिलाओं की स्थिति में व्यापक सुधार हुआ है। इसका प्रमुख कारण है महिलाओं का शिक्षित होना। व्याख्यानमाला के उपरांत निर्णायक मंडल ने विजेताओं की घोषण की। इसमें प्रथम स्थान भावना रायकवार, द्वितीय स्थान अंजली झा और तृतीय स्थान साहीन बानो और सोनिया विश्वकर्मा ने प्राप्त किया।च विजेताओं और प्रतिभागियों को अतिथियों ने मेडल और प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया। इसके उपरांत उपस्थित छात्राओं को अतिथियों ने नारी गरिमा को अक्षुण्य बनाए रखने की शपथ दिलवाई। इसके साथ ही शपथपत्र भरवाए गए। इस दौरान डायरेक्टर सौरभ यादव ने अमर उजाला की मुहिम की सराहना की। महिला महाविद्यालय की प्राचार्य डा. सूफिया ने महिलाओं के लिए चलाई जा रही अमर उजाला की मुहिम की प्रशंसा की। इस मौके पर प्रशिक्षण महाविद्यालय के प्राचार्य महेश कुमार झा, डा. वंदना याज्ञिक, अल्का यादव, प्रीति शुक्ला, दीपिका जैन, आकांक्षा दुबे, रजनी यादव, पूजा झा, संध्या रजपूत, दिव्या मेहरा, साधना नागल, नीलम राजपूत, रत्ना याज्ञिक, छाया सेन, भूपेंद्र कुमार, जुनैद रजा, नारायणदास, प्रकाशनारायण साहू, ओमप्रकाश यादव, प्रसन्न कुमार विश्वकर्मा, मनोज दुबे, विशाल कनोजिया आदि मौजूद रहे। संचालन संध्या राजपूत ने किया और आभार प्राचार्य महेश कुमार झा ने व्यक्त किया।
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