लंपी वायरस से बचाव : जनपद में अभी तक एक लाख 34 हजार गोवंश का हो चुका है टीकाकरण
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जनपद में मध्य प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों से लंपी वायरस के प्रवेश करने पर चेते पशुधन विभाग ने टीकाकरण के बिना अन्ना पशुओं को 31 अक्तूबर तक गोआश्रय स्थलों में भेजने पर रोक लगा दी है। इधर विभाग पशुओं के टीकाकरण में तेजी लाते हुए अब तक 1.34 लाख गोवंशों का टीकाकरण कर चुका है।
24 अगस्त को गुढ़ा गांव में लंपी वायरस के चार गोवंश मिलने के बाद पशुपालन विभाग ने टीकाकरण प्रारंभ कर दिया था। हालांकि इस दौरान लंपी वायरस की चपेट में आए गोवंशों की संख्या 71 हो गई थी। इनमें एक पशु की जान भी चली गई। विभागीय अफसरों का कहना है कि जनपद में लंपी वायरस को देखते हुए टीकाकरण गति तेज कर दी गई है। शासन ने पहले 25 हजार वैक्सीन भेजी थी, लेकिन जब जनपद में विभिन्न चरणों में 2.25 लाख वैक्सीन भेज दी है।
जनपद में वैक्सीन लगाने के लिए 18 टीमों को गठन किया गया। सबसे पहले गोवंश आश्रय स्थलों पर मौजूद 43 हजार 833 गोवंशों को यह वैक्सीन लगाई गई। इसमें सहभागिता योजना के 9196 पशु भी शामिल हैं। इसके बाद मध्यप्रदेश की सीमावर्ती इलाकों से वैक्सीन लगाते हुए अन्य ग्रामीण इलाकों के अन्ना पशुआें को लगाया जा रहा है।
इसके अलावा जिला मुख्यालय पर कंट्रोल रूम की स्थापना भी की गई है। जहां पर भी लंपी वायरस की शिकायत मिलती है, वहां पशुपालन विभाग की टीमें रवाना होकर गोवंश का इलाज करती हैं। शासन से 72 हजार और वैक्सीन जल्द आने वाली हैं। यह वैक्सीन आठ माह की गर्भवती व चार माह के गोवंश को नहीं लगाई जा रही हैं, क्योंकि इससे गोवंश को नुकसान पहुंचने की संभावना है।
फिलहाल अन्ना जानवरों को बगैर टीकाकरण के गोआश्रय स्थलों पर भेजने के लिए 31 अक्तूबर तक रोक लगा दी गई है। पशुगणना के अनुसार जनपद में गोवंश की संख्या 2 लाख 97 हजार है।
जनपद में लंपी रोग के गोवंश पाए गए हैं। मध्यप्रदेश से यह रोग जनपद में आया है। वैक्सीन का कार्य तेजी चल रहा है। मच्छर व मक्खी इस रोग को तेजी से फैलाते हैं। ग्रामीण इलाकों में सैनिटाइजेशन किया जा रहा है। गोवंश आश्रय स्थलों पर शत-प्रतिशत वैक्सीन करा दिया गया है।
-डॉ. डीपी सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी।