ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से पीड़ित बहुत से किसानों को अब तक मुआवजा राशि नहीं मिली है। किसानों ने जैसे- तैसे खरीफ की सफलें बोई थीं। उन्हें उम्मीद थी कि यह फसल अच्छी हो जाएगी तो उनका रबी की फसल की तैयारी करने का खर्चा और घरेलू खर्च निकल आएगा, लेकिन किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर रहा है। जुलाई का महीना पूरा निकल गया और अगस्त के भी तीन दिन निकल गए हैं, लेकिन अब तक जिले में पानी नहीं बरसा है, या यूं कहें कि यहां पर अभी बरसात का सीजन ही नहीं आया है।
किसानों ने खेतों में उर्द, मूंग, तिली, मक्का, सोयाबीन आदि की फसलें बोई हैं, लेकिन पानी नहीं बरसने के कारण अब तक करीब चालीस फीसदी फसलें सूख गई हैं। यदि यही स्थिति रही और चार- पांच दिन में पर्याप्त पानी नहीं बरसता है तो फसलों का बच पाना मुश्किल लग रहा है। ग्राम बार, दशरारा, भैलोनी लोध, फड़ारी, चिगलौआ, बछरावनी, भावनी, तुर्का, खेरा, ककवर, धमना, पुलवारा, राठखेरा, करमईपुरा, पाचौनी आदि गांवों में फसलें सूखने के कगार पर हैं। बहुत से गांवों में अभी तक किसानों को ओलावृष्टि का मुआवजा नहीं मिला है, ऐसे में किसान आशंकित हैं कि यदि उनकी फसल नष्ट हो गई और सरकार से कोई मदद नहीं मिली तो वह परेशान हो जाएंगे।