ललितपुर। प्रदेश सरकार का प्रमुख उद्देश्य किसानों की समस्याओं को दूर करना है। ऐसा तभी होगा जब उनके अनाज को सही दामों में खरीदा जाए। इसी लिए सरकार ने प्रदेश में अस्सी लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है। जिले में 50 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद अब तक हो चुकी है। बिजली समस्या दूर करने के लिए 30 घंटे में ट्रांसफार्मर बदले जाएंगे। यह बातें जिले के प्रभारी मंत्री और प्रदेश के कृ षि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने पत्रकार वार्ता में कहीं। वहीं, कई सवालों के जवाब देने से वह कन्नी काटते रहे।
जिले की कानून व्यवस्था और विकास कार्यों की समीक्षा करने आए कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने कहा कि प्रदेश सरकार ने 30 घंटे के अंदर ट्रांसफार्मर बदलने का निर्णय लिया है। इसके तहत जिले में काम हो रहा है। सिर्फ दलौआ गांव में समस्या मिली है जहां ट्रांसफार्मर नहीं बदला जा सका है। इसके अलावा गांवों में 16 से 17 घंटे बिजली दी जा रही है। जिले में पांच सबस्टेशन बनाए जा रहे हैं। इनका कार्य पूरा होने के बाद हर गांव में 18 घंटे बिजली मिलने लगेगी। दीनदयाल उपाध्याय विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत 712 गांवों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। अभी तक 635 गांवों में इसका कार्य हो चुका है। 24 गांव पेयजल संकट से जूझ रहे हैं, जहां टैंकर के माध्यम से पानी पहुंचाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि किसानों की समस्या दूर करना प्रदेश सरकार का प्रमुख उद्देश्य है। ऐसा तभी हो सकता है जब किसान की फसल को बाजार में सही दाम मिलें। इसी लिए सरकार ने गेहूं खरीद का इस बार लक्ष्य बढ़ाया है। 80 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद के सापेक्ष अब तक 50 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है। यह खरीद 84 करोड़ 54 लाख रुपये की हुई है। इसमें से 82 करोड़ 50 लाख रुपये का भुगतान किसानों को कर दिया गया है।
जिले की बिगड़ी कानून व्यवस्था पर प्रभारी मंत्री कुछ नहीं बोले। उन्हें जब बताया गया कि अवैध शराब का व्यवसाय करने वाले लोगों द्वारा एक दरोगा को पीटा गया और उसकी अभी तक रिपोर्ट नहीं लिखी गई। थानों में हो रहे भ्रष्टाचार पर भी कृषि मंत्री चुप्पी साधे रहे। प्रेस कांफ्रेंस में डेढ़ घंटे से अधिक समय बाद पहुंचे मंत्री ने मात्र बीस मिनट में वार्ता खत्म कर दी। जिले में हो रहे खनन, क्रय केंद्रों पर किसानों के साथ लूट, सूखा राहत चेक वितरण के नाम पर धांधली, चेकडैम के निर्माण के बाद भी डूब क्षेत्र के किसानों को मुआवजा न मिलने जैसे सवालों पर वह बोलने से कतराते रहे।