शहर की कांशीराम आवासीय कालोनियों में करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई पानी की टंकियां शोपीस बनी हुई है। वर्षों बीतने के बाद भी इन टंकियों को स्थानीय लोगों की जरूरतों के लिए शुरू नहीं किया जा सकता है। इन टंकियों का निर्माण जलनिगम द्वारा कराया गया है, लेकिन कार्ययोजना अब तक परवान नहीं चढ़ सकी है। जल निगम बीते कई वर्षों से लगातार जल संस्थान से पत्राचार करके इन टंकियों को हैंडओवर लेने की बात कह रहा है, लेकिन टंकियों व जलापूर्ति सिस्टम में तमाम खामियां होने के कारण जल संस्थान इनको हैंडओवर नहीं कर रहा है।
बीते कई वर्षों से चल रहे इस पत्राचार के खेल को जिला प्रशासन भी रोकने के ठोस कदम नहीं उठा रहा है और कांशीराम कालोनियों में जलापूर्ति के लिए कोई कड़ा रुख नहीं अपना रहा है। कालोनियों में रहने वाले करीब डेढ़ हजार से अधिक परिवार को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन को अपना दखल देना होगा, तभी करोड़ों रुपये की यह योजना शासन की मंशा के अनुरूप परवान चढ़ सकेगी। बुंदेलखंड विकास निधि से उक्त सभी कालोनियों में पानी की टंकी, ट्यूबवेल और पंपहाउस और कालोनी में बने आवासों में नलों की फिटिंग व कालोनियों की छतों पर फाइबर की टंकी की व्यवस्था करनी थी। जल संस्थान ने हाल ही में जल निगम को टंकियों की खामियों की रिपोर्ट भेजी है, जिस कारण विभाग टंकियों को हैंडओवर नहीं ले रहा है।
जल संस्थान द्वारा निकाली गई खामियां
हाल ही में जलनिगम विभाग ने जल संस्थान को पत्र भेजकर कांशीराम कालोनियों में बनी टंकियों को हैंडओवर लेने की बात कही है। इसके बदले में जल संस्थान के अधिशासी अभियंता वीके श्रीवास्तव ने अपने अवर अभियंता विनोद यादव ने टंकियों की भौतिक स्थिति का निरीक्षण करके जल निगम को रिपोर्ट सौंप दी है। गौरतलब है कि जल संस्थान ने वर्तमान में जो रिपोर्ट सौंपी है उसमें दर्शाई गई कमियां बीते कई वर्षों से बनी हुई है। हर बार जल संस्थान इन कमियों को दूर करने के लिए जलनिगम को बोलता है, लेकिन जल निगम के अधिकारी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। जल संस्थान द्वारा प्रेषित की गई वर्तमान रिपोर्ट के आधार पर टंकियों का वास्तविकता स्थिति यह है।
1-आईटीआई के पीछे स्थित कालोनी
यहां पर पंप का संचालन के लिए कर्मी तो तैनात है, लेकिन टंकी का निर्माण होने के बाद एक भी दिन चालू नहीं हो सकी है। यहां पर पंप से सीधे ही जलापूर्ति की जा रही है, लेकिन ऊपर की किसी भी मंजिल पर पानी नहीं पहुंचता है। टंकी के ऊपर ढक्कन नहीं है, जिस कारण टंकी के भीतर काफी गंदगी व्याप्त है। इसके अलावा ट्यूबवेल नंबर 02 पर मेन स्विच नहीं है।
2-खिरकापुरा में स्थित कालोनी
यहां पर पंप का संचालन करने के लिए कर्मी तैनात है, लेकिन निर्माण के बाद से ही टंकी एक बार भी चालू नहीं हो सकी है। पंप से सीधे ही जलापूर्ति की जा रही है, लेकिन टंकी चालू नहीं होने के कारण ऊपर की मंजिलों पर पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
3-आरएमवी कॉलेज के सामने स्थित कालोनी
यहां पर भी पंप का संचालन करने के लिए कर्मी तैनात है, लेकिन टंकी नियमित रूप से चालू नहीं है। कुछ वर्षों से बंद पढ़ी हुुई है। एक बोर है जो फेल है। उसके स्थान पर नया ट्यूबवेल कराना जरूरी है।
4- सुरई घाट कालोनी
यहां पर पंप का संचालन कराने के लिए कर्मचारी तैनात है, लेकिन टंकी अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। वर्तमान बोर कालोनी से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर है, जिससे आंशिक रुप से जलापूर्ति हो पाती है। एक नया बोर कराने की आवश्यकता है।
5-गोविंद नगर कालोनी
पंप का संचालन करने के लिए कर्मी तैनात है, आज तक टंकी चालू नहीं की गई है। यहां पर दो ट्यूबवेल हैं इनमें से एक खराब है और एक रिबोर योग्य है। दोनों ट्यूबवेल चालू कराए बिना जलापूर्ति नहीं की जा सकती है।
6- नारायणपुरा कालोनी
टंकी का निर्माण होने के बाद से अब तक एक बार भी टंकी चालू नहीं हो सकी है। पाइप लाइन अधूरी है और कई जगहों पर टूटी है। पाइप लाइन को पूरा कराने व मरम्मत कराने की आवश्यकता है। इसके अलावा ओपिन लाइन भी उखड़ चुकी है।
योजना डीपीआर नहीं दी गई
जल निगम बीते वर्षों में अब तक अपनी खामियों को दूर नहीं कर सका है। इसके अलावा अब तक योजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) भी नहीं दी गई है। बिना डीपीआर के कैसे पता चलेगा कि वास्तविक कार्ययोजना क्या थी और उसके अनुसार कितना कार्य किया गया है। जब तक खामियां दूर नहीं की जाती है और डीपीआर उपलब्ध नहीं कराई जाती है तब तक योजना को हैंडओवर नहीं करेगें।
-वीके श्रीवास्तव
अधिशासी अभियंता, जल संस्थान।
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कब तक करें मेंटीनेंस
यह कालोनियां करीब सात-आठ वर्ष पुरानी है, शुरुआत में ही टंकियों को चालू करा दिया गया था, लेकिन जल संस्थान ने अभी तक इनको अपने अधीन नहीं लिया है। बीते इन वर्षों में कुछ कमियां आ गई हैं, विभाग कब तक मेंटीनेंस करेगा। यदि जल संस्थान हैंडओवर के लिए तैयार हो जाए तो वह कमियां भी दूर कराने के लिए तैयार है, लेकिन जल संस्थान अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हटता है।
-अमर सिंह कटियार
अधिशासी अभियंता, जल निगम।