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प्यास नहीं बुझा पा रही पेयजल योजना

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ग्राम मथुराडांग की पानी की टंकी - फोटो : LALITPUR
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पुलवारा। मथुरा डांग ग्राम समूह पेयजल योजना ग्रामीणों की प्यास बुझाने में नाकाम साबित हो रही है। ब्लाक बार व तालबेहट के चौबीस गांव की पैंतीस हजार आबादी को पेयजल मुहैया कराने के लिए मथुरा डांग ग्राम समूह पेयजल योजना शुरू की गई, लेकिन दस वर्ष बीतने के बाद यह योजना जिम्मेदारों की लापरवाही का शिकार हो गई है। करीब 40 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी पानी की टंकियां खाली हैं।
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राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना के तहत वर्ष 2010 में बार और तालबेहट ब्लाक के 24 गांवों में पानी पहुंचाने के लिए मथुरा डांग ग्राम समूह पेयजल योजना शुरू की गई। इसके तहत शहजाद बांध से पानी को लिफ्ट करके बार ब्लॉक के ग्राम पुलवारा, धमना, गैंदोरा, लड़वारी, बरौदाडांग, पारौन, भैलोनीसूबा, मथुराडांग, सेमराडांग, बस्तगुवां, गढिया एवं तालबेहट ब्लाक के ग्राम रमपुरा, कठवर, संसुवा, खैरी डांग, खैरा डांग, खिरियाडांग, कंगीरपुरा, ककरेला, सुनपुरा, वसवाहा, जिजरवारा, रजपुरा, मनपुरा, चुनगी आदि गांवों में पाइप लाइन बिछाकर पानी पहुंचाने का उद्देश्य था। इसके लिए पांच गांवों में पानी की टंकियां बनाकर पाइप लाइन डाली गई। लेकिन, इस कार्य में भारी लापरवाही बरती गई।
पाइप लाइन बिछाने का काम गुणवत्तापूर्वक तरीके से नहीं किया गया। इस कारण टेस्टिंग के वक्त ही इन पाइपों से पानी रिसने लगा। कुछ टंकियों में भी रिसाव होने लगा, जिससे कुछ ही गांवों में पानी पहुंच सका। कई जगहों पर पाइप लाइन लीकेज व टंकी लीकेज से पानी की आपूर्ति नहीं हो सकी। मथुराडांग ग्राम समूह पेयजल योजना के अंतर्गत पांच जोन बनाकर ग्राम पुलवारा, लड़वारी, बरौदाडांग, पारौन और सेमराडांग में टंकियों का निर्माण कराया गया। पेयजल योजना का निर्माण वर्ष 2010 में प्रारंभ हुआ छह वर्ष के बाद वर्ष 2016 में विभाग द्वारा इसकी टेस्टिंग की गई। लेकिन, ग्राम कठवर में दस वर्ष बीतने के बाद भी पाइप लाइन नहीं पहुंच सकी। टेस्टिंग के बाद ग्राम रमपुरा, जिजरवारा, संसुआ, कंगीरपुरा, लड़वारी की सहरिया बस्ती, गैंदोरा आदि ऐसे गांव ऐसे हैं, जहां पर आज तक सुचारु रूप से पानी की आपूर्ति नहीं हो सकी है।
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हमने मथुरा डांग ग्राम समूह पेयजल योजना जल संस्थान को हैंडओवर कर दी है। अब उसकी देखरेख की जिम्मेदारी जल संस्थान की है।
- प्रवीण कुट्टी, परियोजना प्रबंधक/ नोडल अधिकारी
जल निगम
- कुछ दिन पहले फाल्ट आया था, जिसकी मरम्मत करा दी गई है। यदि कहीं पर और फाल्ट है तो उसे दिखवाकर मरम्मत करा दी जाएगी।
- संजीव कुमार, अधिशाषी अभियंता, जल संस्थान
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