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जिला अस्पताल में पानी की समस्या से परेशान मरीज

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ललितपुर। जिला अस्पताल में समस्याएं कम नहीं हो पा रहीं हैं। वार्डों में भर्ती मरीज पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। मरीजों को पानी के लिए हैंडपंप का सहारा लेना पड़ रहा है।
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जिले में न तो बड़ेे नर्सिंग होम हैं और न बेहतर उपचार की सुविधा है। ऐसे में जिले की 14 लाख आबादी के उपचार के लिए जिला अस्पताल प्रमुख अस्पतालों में गिना जाता है। यहां पर समीपवर्ती मध्यप्रदेश के जिलों केे लोग भी इलाज कराने के लिए आते हैं। इससे काफी भीड़ रहती है। अस्पताल में ओपीडी के समय में लगभग डेढ़ हजार मरीज आते हैं। इमरजेंसी में भी मरीज इलाज कराने आते हैं। वर्तमान में जिला अस्पताल में चार वार्ड संचालित हो रहे हैं, जिनमें विभिन्न बीमारियों से ग्रसित मरीजों को भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है।
लेकिन, मरीजों को समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। अब तक सीटी स्कैन की सुविधा शुरू नहीं की जा सकी है। वार्डों में पेयजल की समस्या बनी हुई है। दिन में तो दूर रात्रि में भी पेयजल सुविधा नहीं मिल पा रही है। मरीजों के तीमारदार दिन में परिसर के इर्द-गिर्द से पानी जुटा लेते हैं। कुछ मरीज बाहर लगे हैंडपंप से पानी लाने को मजबूर हैं। जो मरीज तीसरी मंजिल पर बने वार्ड में भर्ती होते हैं, उन्हें सर्वाधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई मरीजों को अधिक बर्तन न होने से पानी जुटाने की समस्या हो जाती है। दिन में तो बाहर घूम कर पेयजल की व्यवस्था कर लेते हैं, लेकिन रात्रि में अधिक समस्या जटिल हो जाती है।
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जानकारी के अभाव में तीमारदार बाहर आने डरते हैं। मरीज को अकेले छोड़ने की समस्या आती है। ऐसे में कई मरीज तो प्यासे रहकर रात गुजारते हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार अनदेखा कर रहे हैं।
अस्पताल के वार्डों में पेयजल की सुविधा नहीं है। ऐसे अधिकांश मरीजों के तीमारदार बाहर से पानी जुटा रहे हैं। वहीं अकेले मरीजों को पानी जुटाना मुश्किल हो रहा है। अकेले होने के कारण पलंग छोड़कर जाने में परेशानी होती है। हालत खराब होने पर चलने- फिरने में समस्या होती है।
जिला अस्पताल में मरीजों को पेयजल की सुविधा मुहैया कराने के लिए तीन वॉटर कूलर लगाए गए हैं। इनमें दो वॉटर कूलर डेढ़ वर्ष से खराब पड़े हैं। बुजुर्ग वार्ड में लगा वाटर कूलर ही पेयजल के लिए सहारा बना है। लेकिन, यह अधिक अंदर होने के कारण अधिकांश मरीजों को इसकी जानकारी नहीं हो पाती है। मजबूरन मरीज हैंडपंप व टंकी के पानी से प्यास बुझा रहे हैं।
अस्पताल में टंकी भरने के लिए लगाई गई मोटरों में एक मोटर खराब हो गई। इससे दो दिनों तक तृतीय तल पर बने शौचालयों में पानी की कमी रही। इनकी सफाई करने के लिए द्वितीय तल की टंकियों को बंद करना पड़ा, तब जाकर तीसरे तल पर पानी पहुंचा।
अस्पताल में विभिन्न वार्डों के अलावा प्राइवेट वार्ड में भी भर्ती मरीजों को पानी नहीं मिल पा रहा है। जबकि, विभाग द्वारा मरीजों से प्राइवेट वार्ड में भर्ती करने का चार्ज अलग से लिया जा रहा है। इसके बावजूद पेयजल तो दूर शौचालय के लिए भी पानी नहीं मिल पा रहा है। इससे मरीजों को दिक्कत हो रही है।
मरीज को उपचार के लिए भर्ती किया है, लेकिन वार्ड में पेयजल के लिए कोई सुविधा नहीं है। दिन में तो पानी लाने में कोई दिक्कत नहीं है। रात में ठंड पड़ने पर जाने में समस्या होती है।
- रामस्वरुप कुशवाहा
अस्पताल के तीसरे तल के वार्ड पर भर्ती मरीज का इलाज चल रहा है। लेकिन, पेयजल के लिए अधिक परेशान होना पड़ रहा है। पानी के लिए बाहर लगे हैंडपंप पर जाना पड़ रहा है।
- ब्रजभान रमपुरा
अस्पताल के तृृतीय तल पर लगा वाटर कूलर खराब पड़ा है, जिससे पेयजल की समस्या हो रही है। बजट के अभाव में कूलर ठीक नहीं हो पा रहा है। बजट मिलते ही समस्या का निराकरण कराया जाएगा।
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- डॉ. एसके वासवानी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
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