संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जामनी बांध से पानी का रिसाव होने के निचले क्षेत्र के ग्रामीणों में दहशत है। सिंचाई विभाग ने रिसाव बंद करने के लिए यहां एक फिल्टर प्वाइंट बनाया, जो नाकाफी साबित हुआ। पानी के साथ मिट्टी न आने के कारण सिंचाई विभाग के अधिकारी रिसाव से किसी प्रकार के खतरे से इन्कार कर रहे हैं।
तहसील मड़ावरा क्षेत्र में जामनी नदी पर करीब 51 साल पूर्व बांध का निर्माण किया गया था। बांध का पूर्ण जलस्तर 403.55 मीटर है। वर्तमान में जलस्तर 403.25 मीटर है। बांध में पानी भरने की कुल क्षमता 92.87 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) है। हाल में बांध में 84.95 एमसीएम पानी भर चुका है। बांध से निकली नहरों के जरिये करीब 11 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई और 80 से अधिक गांवों में पेयजल की आपूर्ति की जाती है। कुछ दिन पूर्व बांध से पानी का रिसाव शुरू हो गया।
विभागीय अधिकारियों को इसकी भनक लगते ही वह मौके पर पहुंचे और निरीक्षण किया। रिसाव बंद करने के लिए डाउन स्ट्रीम में बालू, छोटी गिट्टी, बड़ी गिट्टी और इसके ऊपर बड़े पत्थर बोल्डर की पिचिंग करके करीब 15 मीटर लंबाई का फिल्टर बनाया गया। लेकिन, रिसाव बंद नहीं हो सका। सिंचाई विभाग के अधिकारी निचले इलाकों के ग्रामीणों को आश्वस्त कर रहे हैं कि बांध से किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है।
एक फीट और भरना बाकी :
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बांध को कुल 1324 फीट तक भरा जाना है। 1323 फीट पर पानी पहुंचने के बाद रिसाव शुरू हुआ है। इससे बांध को खतरा नहीं है, क्योंकि अब सिर्फ बांध को एक फीट और भरना है।
17.91 करोड़ से होना है बांध का जीर्णोद्धार
बांध के काफी पुराना होने के कारण इसके जीर्णोद्धार के लिए विश्व बैंक पोषित बांध सुरक्षा एवं पुनर्वास योजना फेज-2 के तहत इसे चयनित किया गया था। बांध के जीर्णोद्धार के लिए 17.91 करोड़ रुपये की कार्ययोजना स्वीकृत है। इससे बांध से सीपेज, लीकेज की मरम्मत सहित अन्य सुधार कार्य कराए जाने हैं। वर्तमान में इसको लेकर निविदा प्रक्रिया चल रही है।
बांध से रिसाव बंद करने के लिए करीब 15 मीटर तक फिल्टर बना दिया गया है। रिसने वाले पानी में मिट्टी नहीं आ रही है, इस कारण बांध को कोई खतरा नहीं है। रिसाव बंद करने के लिए प्रयास किया जा रहा है।
इंजी. भूपेश सुहेरा, अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड