भूगर्भ जल स्तर नीचे जाने से क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई का संकट उत्पन्न हो गया है। कुएं, हैंडपंप और टयूबवेल से पानी नहीं आ रहा है। ज्यादातर प्राकृतिक जल स्रोत भी सूख गए हैं।
पिछले तीन वर्ष से लगातार सूखे की मार झेल चुके बुंदेलखंड क्षेत्र के किसानों को बीते वर्ष हुयी अच्छी बारिश से थोड़ी राहत मिली। लेकिन, इस बार क्षेत्र का जलस्तर नीचे जाने से कुएं, हैंडपंप ओर ट्यूबवेल से पानी नहीं आ रहा है। वहीं प्राकृतिक जल स्रोत तालाब और नदियों का जल सूखता जा रहा है। ऐसे में जहां किसानों सिंचाई के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, पशुओं को पेयजल के लिए भटकना पड़ रहा है। किसान अब बारिश की आस में हैं। यदि बारिश नहीं होती है तो सब्जी, तरबूज, ककड़ी, खीरा आदि फसलों को भारी नुकसान हो जाएगा। क्षेत्र के किसान बताते हैं कि जो किसान आर्थिक रूप से मजबूत हैं, वे विभिन्न संसाधनों से पानी उपलब्ध कर ले रहे हैं। लेकिन, गरीब किसानों की मुसीबत बढ़ती जा रही है।
जल स्तर गिरने से कुएं सूखे
तहसील मड़ावरा एंव विकास खण्ड महरौनी के गांव साढूमल में जल स्तर गिरने से लगभग एक सैकड़ा कुएं सूख चुके है। जो कूप कभी पूरे गांव की प्यास बुझाते थे आज उनकी देख रेख नहीं होने से वह कूड़ा घर बन चुके है। साढूमल में खेती के लिए एक मात्र सहारा ट्यूबवेल का है यह गांव ऊँचाई पर बसा होने से नहरों की सुविधा नहीं है।
मात्र बीस घरों को मिल पाता है पानी
कस्बा साढूमल में पेयजल व्यवस्था के लिये जल संस्थान द्वारा ट्यूबवेल लगवाकर पेयजल की आपूर्ति की जाती है। पचास से साठ लोगों ने संयोजन कराये थे लेकिन नलों में पानी नहीं आने से अधिकांश लोगों ने अपना संयोजन विच्छेद करा लिये है। जल स्तर गिरने से नजदीक के लगभग बीस घरों में ही आपूर्ति हो पाती है वह भी घरों के बाहर से पानी भरना पड़ता है।
वर्जन
ग्राम सभा को है अधिकार
जर्जर हालत में पहुंच चुके नलकूपों की मरंमत एवं गहरी करण कराने का अधिकार ग्राम सभा को है इस कार्य के लिए ग्राम प्रधान प्रस्ताव पास कराकर किसी भी निधि से कार्य करवा सकता है।
- पीएन द्विवेदी, खंड विकास अधिकारी।