ललितपुर। जल विहार पर्व को देखते हुए गोविंद सागर बांध से नहर होते हुए प्राचीन सुम्मेरा तालाब को भरने के लिए जा रहा पानी बर्बाद हो रहा है। हजारों लीटर पानी तालाब में न जाकर नाले में होते हुए बेकार बह रहा है। लेकिन, सिंचाई विभाग के जिम्मेदार उदासीन बने हुए हैं।
नगर में 24 सितंबर को मनाए जाने वाले जल विहार पर्व को देखते हुए डीएम जुहेर बिन सगीर के निर्देश पर सुम्मेरा तालाब को भरने का काम किया जा रहा है। गोविंद सागर बांध से छोटी नहर से पानी करीम नगर होते हुए तालाब में पहुंचाने का काम किया जा रहा है। इसके लिए अलग से मार्ग बनाया गया है, लेकिन सिंचाई विभाग के अफसरों ने नहर के माध्यम से एक दिन पहले पानी पहुंचाना शुरू कर दिया है। कुछ पानी तो सुम्मेरा तालाब पहुंच रहा है, लेकिन अधिकांश भाग तालाबपुरा रोड स्थित संतोषी माता के बगल से नाले में पहुंच जा रहा है। गंदे नाले होते हुए पेयजल शहजाद नदी में समा जा रहा है। बारिश नहीं होने से तालाब के साथ बांध में बहुत कम पानी है।
इससे गर्मी में पेयजल संकट की स्थिति खड़ी हो सकती है। लेकिन, सिंचाई विभाग के अफसर इस बहुमूल्य पेयजल को बर्बाद होने से नहीं रोक रहे हैं। 24 घंटे से अधिक होने के बाद हजारों लीटर पानी बेकार चला गया है, लेकिन सिंचाई विभाग के अफसरों की अब तक नींद नहीं टूटी है। जिम्मेदारों की यह नींद नहीं टूटी तो नगरवासियों के लिए यह नींद काफी भारी पड़ेगी।
सिंचाई के समय भी होती है बर्बादी
सिंचाई विभाग के अफसरों की उदासीनता का हाल रबी फसल के दौरान भी दिखाई देता है। ग्रामीण क्षेत्रों की सिंचाई के लिए निकली नहरों का पानी कई स्थानों पर बर्बाद होता रहता है तो कई किसानों की फसल पानी के अभाव में सूख जाती है। जिम्मेदारों को दौरा करके पानी बर्बाद होने से रोकना चाहिए। लेकिन, ऐसा किया नहीं जाता है। मतलब साफ है कि उनकी उदासीनता कोई नई बात नहीं है।