फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गरीबों के आशियाना में नहीं पहुंच रही पानी की बूंद

Thu, 22 Dec 2016 12:37 AM IST
lalitpur
विज्ञापन
वाटर टैंक - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
गरीब और असहाय लोगों को पक्का आवास और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करने के लिए बसपा के शासन में शहर में छह कांशीराम आवासीय कालोनियों का निर्माण कराया गया था। यहां लोगों को स्वच्छ पेयजल कराने के लिए बुंदेलखंड विकास निधि से पानी की सभी कालोनियों में पानी की टंकी, ट्यूबवेल और पंपहाउस और कालोनी में बने आवासों में नलों की फिटिंग व कालोनियों की छतों पर फाइबर की टंकी की व्यवस्था करनी थी।
विज्ञापन


पानी की टंकी बनाने काम वर्ष 2010 में जल निगम को दिया गया था, इसमें आईटीआई कॉलेज के पीछे बनी कालोनी के लिए 26.70 लाख रुपये, गोविंद नगर कालोनी के लिए 26.70 लाख रुपये, आरएमवी कॉलेज के पास बनी कालोनी के लिए 29 लाख रुपये, सुरई घाट कालोनी के लिए 34 लाख रुपये, खिरकापुरा कालोनी के लिए 9.50 लाख व नारायणपुरा में स्थित कालोनी में 9.95 लाख रुपये की लागत से पानी की टंकी बनाई जानी थी। जल निगम ने कुल 1.36 करोड़ रुपये की लागत से पानी की टंकियों का निर्माण तो करा दिया है और कार्यदाई संस्था का पूर्ण भुगतान भी कर दिया है। वहीं, कालोनियों में बने आवासों में नलों के कनेक्शन व अन्य सुविधाओं के नाम पर भी करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, इसके बावजूद छह वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद अभी तक कालोनियों में रहने वाले करीब डेढ़ हजार परिवारों को स्वच्छ पेयजल नसीब नहीं हो पाया है। इन कालोनियों की पेयजल व्यवस्था पूरी तरह से हैंडपंपों के सहारे टिकी हुई है।  

 कागजों में दब गई टंकियां
वर्ष 2010 में जल निगम द्वारा पानी की टंकियों का निर्माण करा दिया गया था, पांच वर्ष बीतने के बाद भी अभी तक जल संस्थान ने इन टंकियों को हैंडओवर नहीं किया है। इस दौरान सत्ता परिवर्तन होने के बाद और विभागीय अधिकारियों के हस्तांतरण होने के बाद करोड़ों की टंकियों व कांशीराम पेयजल योजना विभागीय फाइलों में दब कर रह गई है। इस संबंध में जलनिगम के अधिशासी अधिकारी अमर सिंह कटियार ने बताया कि मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं है, अभी तक इस संबंध में कोई शिकायत भी नहीं आई है, यदि अभी तक टंकियां जल संस्थान को हैंडओवर नहीं की गई हैं, तो जल्द ही विभागीय कार्रवाई पूर्ण करके जल संस्थान को पत्र भेजा जाएगा। वहीं, जल संस्थान के अधिशासी अधिकारी रघुवीर कुुमार का कहना है कि उनके कार्यकाल को करीब एक वर्ष होने वाला है, लेकिन अभी तक जल निगम द्वारा टंकियों को हैंडओवर करने के लिए कोई पत्राचार नहीं किया गया है। यदि जल निगम प्रस्ताव रखता है तो योजना की धरातल पर स्थिति देखकर नियमानुसार टंकियों को हैंडओवर कर लिया जाएगा। विभागीय अधिकारियों का स्थानांतरण जरूर हो गया है, लेकिन कालोनियों में पेयजल की समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है।
विज्ञापन


यह है कालोनियों की वास्तविक स्थिति

आईटीआई कॉलोनी
 वार्ड नंबर 10 में स्थित आईटीआई कॉलेज के पीछे बनी कांशीराम कॉलोनी में  साढ़े तीन सौ से अधिक परिवार निवास करते हैं। यहां बनी पानी की टंकी का कोई सहारा नहीं है, ट्यूबवेल के सहारे केवल नीचे की मंजिलों में रहने वाले परिवारों के ही नलों  में पानी मिल पाता है। ऊपर की मंजिलों पर रहने वाले तीन सौ परिवारों हर रोज सुबह शाम पानी ढोते हैं।

आरएमवी कॉलेज के सामने वाली कालोनी
 नवीन गल्ला मंडी के पीछे वार्ड नंबर सात में राजकीय महाविद्यालय के पास बनी कांशीराम कॉलोनी में करीब चार सौ परिवार रहते हैं। स्थानीय लोगों व पार्षद द्वारा अनेकों बार जलापूर्ति की मांग की गई है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई है। यहां पर लोगों को हैंडपंप से पानी ढोने में काफी समस्या खड़ी होती है।

वार्ड नंबर 01 की तीनों कालोनियों की टंकी शोपीस
 वार्ड नंबर 01 में स्थित तीन मुहल्लों में अलग-अलग कांशीराम आवासी कालोनियां हैं। मुहल्ला सुरईघाट कालोनी में करीब साढ़े तीन सौ परिवार रहते हैं। खिरकापुरा में स्थित कॉलोनी में 64 परिवार रहते हैं और मुहल्ला नारायणपुरा में स्थित कांशीराम कॉलोनी कुल 32 परिवार निवास करते हैं। इन कालोनियों बनी टंकिया केवल शोपीस बन कर रह गई है, लोगों को स्वच्छ पेयजल नसीब नहीं हो पा रहा है।

गोविंद नगर कॉलोनी
 वार्ड नंबर 11 गोविंद नगर में बनी कांशीराम कॉलोनी में साढ़े तीन सौ से अधिक परिवार रहते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार टंकी का कोई सहारा नहीं है। जब पंप चालू किया जाता है तो केवल नीचे की ही मंजिलों पर पानी पहुंचता है। ऊपर की मंजिलों पर रहने वाले लोगों की स्थिति काफी बदतर है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें