नोटबंदी और भुगतान प्रणाली पर लगातार एक माह से भी अधिक समय तक बंद रही गल्ला मंडी के हालत अब धीरे-धीरे सुधरने लगे हैं। कच्चे आढ़तियों ने भी पक्के आढ़तियों के साथ सहमति पर चेक से भुगतान की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। चेक से भुगतान पर वहीं मंडी में आवक भी बढ़कर अब पांच हजार क्विंटल तक पहुंच गई है।
गल्ला मंडी में लगातार एक माह तक बंदी के बाद गल्ला व्यापार पूरी तरह से ठप बना रहा था। इसके बाद मंडी और जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद कच्चे और पक्के आढ़तियों में भुगतान प्रणाली को लेकर आम सहमति बनने के बाद गल्ला व्यापार शुरू किया गया था। शुरू में चेक से भुगतान प्रणाली को लेकर असमंजस की स्थिति के चलते कुछ कच्चे आढ़तियों ने दुकानें बंद रखी थी। लेकिन बाद में अब किसान द्वारा चेक लेकर भुगतान को राजी होने पर गल्ला दुकानें एक बार फिर से गति पकड़ने लगी हैं। इससे जिंस की आवक भी बढ़ गई है। गत दिनों नोटबंदी के बाद गल्ला मंडी खुलने पर शुरुआत में आवक मात्र एक हजार क्विंटल तक रही, लेकिन अब धीरे-धीरे आवक बढ़ने लगी है। बुधवार को मंडी में आवक पांच हजार क्विंटल से भी अधिक रही। मंडी भरी-भरी होने से व्यापारियों के चेहरे भी खिल उठे। वहीं मंडी समिति सचिव ने भी दुकानों पर घूम-घूमकर स्थिति का जायजा लिया और व्यापारियों व किसानों से समस्याएं जानी। लेकिन व्यापार चल पड़ने और दामों में भी थोड़ा उछाल होने से किसानों को कोई अधिक शिकायत नहीं रही। गत दिनों उड़द 4900 रुपये प्रति क्विंटल के सापेक्ष बढ़कर अब बुधवार को करीब 5400 से 5600 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई। हालांकि मंडी बंद होने और नोटबंदी के पूर्व उड़द 6200 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकी थी। वहीं अब मटर 2200 से 2300 रुपये प्रति क्विंटल पर रही। जबकि गेंहूं के दाम 1650 रुपये से 1750 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर रहे।