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Lalitpur News: दस गांवों में पानी का संकट

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संवाद न्यूज एजेंसी
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ललितपुर। जल संस्थान के डोंडाघाट स्थित ग्रामीण क्षेत्र की टंकी से शुरुआती दौर में 12 गांवों में पानी पहुंचता था, लेकिन अब दो गांवों में भी पानी देने में विभाग हांफने लगा है। 10 गांवों में आपूर्ति पूरी तरह ठप है तो जिन दो गांवों में सप्लाई हो रही है, वहां भी हफ्ते में एक ही दिन नलों में पानी आ रहा है। ग्रामीण दूर-दराज से पानी लाने को मजबूर हैं।
डोंडाघाट स्थित टंकी से दो दशक पहले एक दर्जन गांवों में पेयजल आपूर्ति होती थी, इनमें रोड़ा, अमरपुर, महर्रा, नदनवारा, लखनपुरा, बांसी, पनारी, रजवारा, गदयाना, कचनौंदा, देवरान, विघा शामिल था। शुरुआती दिनों में लोगों को पर्याप्त पानी मिला, लेकिन धीरे-धीरे पेयजल योजना दम तोड़ती गई। एक के बाद एक गांवों में आपूर्ति बाधित होती गई। विकल्प के तौर पर कचनौंदा, देवरान और गदयाना में ट्यूबवेल लगाकर आपूर्ति शुरू की गई, वहीं रोड़ा, नदनवारा, अमरपुर, विघा और महर्रा में दस वर्ष से नल नहीं आ रहे हैं। रोड़ा में सबसे ज्यादा समस्या है। यहां हैंडपंप भी सूखे पड़े हैं। वर्तमान में मात्र दो गांव पनारी और रजवारा में ही आपूर्ति की जा रही है। लेकिन, हकीकत यह है कि रजवारा में भी पेयजल आपूर्ति नियमित नहीं है। यहां सप्ताह में एक या दो दिन ही नल आ रहे हैं। कमोबेश यही स्थिति पनारी की भी है।
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ट्यूबवेल से चल रहा काम: बांसी में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनने से बांसी, लखनपुरा और महर्रा की सप्लाई अलग हो गई है। गदयाना, देवरान और कचनौंदा में एक-एक ट्यूबवेल लगाए गए हैं। इसी से पानी की सप्लाई हो रही है।
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रोड़ा में जलस्तर गिरने से 50 हैडपंपों ने छोड़ा पानी
शहर की सीमा से सटी ग्राम पंचायत रोड़ा में करीब आठ हजार की आबादी के लिए लगाए गए 50 हैंडपंप पानी छोड़ गए हैं। प्रधान प्रतिनिधि सुखसागर सिंह बुंदेला ने बताया कि ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए हाईवे स्थित निजी बोरिंग से पानी दिया जा रहा है। सुबह छह से रात नौ बजे तक जब भी किसी को पानी की जरूरत होती है, वह बोरिंग से टंकियां भरकर अपने गांव साइकिल या बाइक से ले जाता है, जबकि आसपास की महिलाएं और बच्चे सिर पर मटका रखकर ले जाते हैं।
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