फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वात्सल्य और रक्षा का पर्व है रक्षाबंधन: मुनिश्री

विज्ञापन
मंच पर मौजूद मुनि सुप्रभ सागर महाराज - फोटो : LALITPUR
विज्ञापन
ललितपुर। मुनिश्री सुप्रभ सागर महाराज ने रक्षाबंधन पर्व पर ऑनलाइन प्रवचन करते हुए कहा कि रक्षाबंधन का पर्व भारतीय संस्कृति का प्रमुख पर्व है। देश के लगभग सभी धर्मों में यह पर्व अत्यंत आस्था और उत्साह से मनाया जाता है। जैन धर्म में यह पर्व सामाजिक ही नहीं, आध्यात्मिक भी है। रक्षाबंधन को वात्सल्य और रक्षा का पर्व कहा जाता है।
विज्ञापन

ग्राम मसौरा में गोशाला में प्रवचन करते हुए उन्होंने कहा कि इस त्योहार का संबंध सिर्फ गृहस्थ से ही नहीं, मुनियों से भी है। रक्षाबंधन का मुख्य महत्व तभी है, जब हम अपने धर्म, धर्मायतनों, मुनिराजों, आर्यिका माताजी आदि साधुओं, राष्ट्र, पर्यावरण की रक्षा हेतु विचार करें। रक्षाबंधन मात्र भाई द्वारा बहन की रक्षा का पर्व नहीं है, बल्कि मां, बेटा, भाई, पति-पत्नी कोई भी हो, सभी के प्रति वात्सल्य एवं प्राणीमात्र की रक्षा का पर्व है। जहां वात्सल्य भाव होता है, वहीं रक्षा का भाव होना संभव है। अत: रक्षाबंधन वात्सल्य पर्व ही है।रक्षाबंधन के दिन जैन मंदिरों में श्रावक-श्राविकाएं जाकर धर्म और संस्कृति की रक्षा के संकल्प रक्षासूत्र बांधते हैं और रक्षाबंधन पूजन करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें