सुम्मेरा तालाब पर डोल ग्यारस के दिन इस बार विमानों की आरती बनारस की गंगा आरती की तर्ज पर की जाएगी। रामलीला हनुमान जयंती महोत्सव समिति ने जल विहार पर्व को भव्यता प्रदान करने के उद्देश्य से ऐसा निर्णय लिया है। वहीं, नगर पालिका प्रशासन भी तैयारियों में जुटा है। पालिका की ओर से तालाब की सफाई, बुर्जो की पुताई, फर्श का समतलीकरण और बिजली की फिटिंग कराई जा रही है।
बुंदेलखंड में मऊरानीपुर के बाद ललितपुर जिले में जल विहार पर्व को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। डोल ग्यारस पर्व आने के कई दिन पहले से इसकी तैयारी शुरू हो जाती हैं। बीते वर्षों में नगर पालिका और महोत्सव समिति के संयुक्त प्रयासों से आयोजन को भव्यता प्रदान की जाती रही है। इसमें मंगला आरती विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। इस बार रामलीला हनुमान जयंती महोत्सव समिति ने मंगला आरती की जगह बनारस की तर्ज पर विमानों की आरती कराने का निर्णय लिया है। वहीं, विमानों के साथ चलने वाली सैरा पार्टी का नृत्य भी सभी का ध्यान अपनी ओर खींचेगा। बता दें कि हर साल डोल ग्यारस पर मंदिरों से भगवान जल विहार के लिए निकलते हैं, जिन्हें विमानों के माध्यम से सुम्मेरा तालाब ले जाया जाता है। इसमें सबसे पहले रघुनाथ जी बड़ा मंदिर के विमान उठते हैं। उनके पीछे कंचनघाट मंदिर, बाबाघाट मंदिर, बूढ़े बाबा मंदिर के विमान साथ चलते हैं। मुहल्ला रावरपुरा से पुरानी बजरिया के रघुनाथ मंदिर का विमान, मुरलीधर मंदिर का विमान साथ हो जाता है। इसी क्रम में महावीरपुरा स्थित मंदिरों के विमान शोभायात्रा में शामिल हो जाते हैं। यह सिलसिला चलता रहता है। घंटाघर से सावरकरचौक तक नगर के अन्य मंदिरों के विमान भी एकत्रित हो जाते हैं। सावरकरचौक पर विभिन्न मंदिरों की ध्वज पताकाएं, विमानों का संगम व उनके साथ चल रहे हजारों भक्तों की भीड़ का नजारा देखते ही बनता है। जब विमान तालाब पहुंच जाते हैं तब उन्हें घाटों पर विराजमान कराया जाता है। जहां भगवान का जलाभिषेक कराया जाता है व विधि विधान से पूजा अर्चना होती है। तदोपरांत सभी विमानों की आरती होती है। इस दौरान श्रद्धालुओं में प्रसाद लेने की होड़ मच जाती है। यहां से विमानों को रामलीला मैदान में ले जाया जाता है। भगवान की आरती होने के उपरांत विमान वापस मंदिरों के रवाना होते हैं। इस दौरान कटरा बाजार में गणेश पंडाल, घंटाघर स्थित गणेश मंदिर एवं चौबयाना स्थित गणेश पंडाल में विमानों की आरती होती है। विमानों के मंदिरों में पहुंचने के साथ आयोजन का समापन हो जाता है।
आंखों की किरकिरी बना तालाब का दूषित पानी
ऐतिहासिक और आस्था से जुड़े हुए सुम्मेरा तालाब की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। करीब एक दशक से तालाब के प्रदूषित पानी को निकालने के प्रयास हो रहे हैं, लेकिन आज तक तालाब के पानी को भगवान के अभिषेक लायक नहीं बनाया जा सका है। बीते वर्षों की तरह इस बार भी मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों को विमानों में गंगाजल साथ लेकर चलना होगा। हालांकि, रामलीला हनुमान जयंती महोत्सव समिति की बैठक में पृथक से गंगाजल उपलब्ध कराने पर सहमति बन गई है। इससे पहले जिला प्रशासन की हुई बैठक में जल संस्थान को गंगाजल की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस तरह कई सालों से तालाब के पानी की जगह पूजा अर्चना में गंगाजल का इस्तेमाल हो रहा है।
सफाई के नाम पर होती औपचारिकता
हर साल तालाब की सफाई डोल ग्यारस पर्व के आसपास कराई जाती है। इसमें घाटों के करीब पसरी जलकुंभी, जहरीली घास व काई को हटाया जाता है। लेकिन, अभी भी तालाब के बीचोबीच कमल के पत्ते व जहरीली घास नजर आ रही है। इसके पीछे नगर पालिका का नजरिया सिर्फ धार्मिक आयोजन कराना है।
नजर नहीं आ रहे तालाब में पैडल वोट
बीते वर्षों में जल विहार पर्व के दौरान तालाब में पैडल वोट उतारे थे। लेकिन, इस बार पैडल वोट नहीं अभी तक तालाब में नहीं उतारे गए हैं।
डूडा करा रहा घाटों का निर्माण
नगरीय विकास अभिकरण तालाब के दो घाटों का निर्माण करा रही है। जिसका काम अभी चल रहा है।