ललितपुर। कई दिनों से हो रही भारी बारिश के चलते खेतों में पानी भर गया है। उड़द और सोयाबीन की फसलें खेतों में डूबने से खराब हो रही हैं। वहीं, जिन किसानों ने अभी बोआई नहीं की है, वह फसल पिछड़ने के डर से चिंतित हैं। किसान बारिश रुकने और उसके बाद खेत सूखने का इंतजार कर रहे हैं।
खरीफ की फसल में 3,32,247 हेक्टेयर लक्ष्य के सापेक्ष अब तक लगभग 2,10, 936 हेक्टेयर में बोआई हो चुकी है, जो लक्ष्य का 63 फीसदी है। कृषि विभाग का यह आंकड़ा सात जुलाई का है। इसके बाद से लगातार रुक-रुककर कई क्षेत्रों में बारिश हो रही है। अधिकांश खेत पानी से लबालब हैं। जिन किसानों ने कुछ दिन पहले ही बोआई की है, उनकी उड़द और सोयाबीन के बीज सड़ गल गए हैं। ऐसे किसानों को फसलें खराब होने का खतरा बढ़ गया है। वहीं, जिन किसानों ने जून की शुरुआत या मध्य में फसल बो दी थी और बीज अंकुरित हो गए हैं, उन्हें बारिश रुकने के बाद फसलें बचने की उम्मीद है।
किसानों ने बताया कि इस बार 5500 से छह हजार रुपये प्रति क्विंटल तक का सोयाबीन का बीज लेकर बोआई की। बोआई से चौबीस घंटे तक खेत सूखा होने चाहिए, लेकिन सोयाबीन की बोआई के कुछ ही घंटों बाद बारिश शुरू होने से बीज खराब हो गए। इसके बाद किसानों ने उन्हीं खेतों में बाद में उड़द बो दी, लेकिन लगातार बारिश से अब उड़द भी सड़ने लगी है। कई किसानों को दोहरा नुकसान भी झेलना पड़ रहा है।
बिरधा, पाली, महरौनी, मड़ावरा और बार क्षेत्र में सबसे अधिक किसान प्रभावित हुए हैं। महराैनी क्षेत्र के ग्राम छायन में खेत लबालब भरे हैं तो नाराहट क्षेत्र में भी किसानों को लगातार हो रही बारिश से सोयाबीन और फिर उड़द की बोआई करने से दोहरा नुकसान हुआ है। अब किसान बारिश रुकने का इंतजार कर रहे हैं। यदि कुछ दिन और बारिश होती है तो किसानों को और भी नुकसान हो सकता है।