मनरेगा कर्मियों पर विभागीय शिकंजा कस गया है। मुख्य विकास अधिकारी ने दो दिन के अंदर काम पर लौटने का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने बीडीओ के माध्यम से भेजे नोटिस में संबंधित ब्लाकों में योगदान नहीं देने पर अनुबंध समाप्त करने की चेतावनी दी है। वहीं, मनरेगा कर्मी बिना मांगों के पूरे हुए हड़ताल खत्म करने के लिए तैयार नहीं हैं। इससे टकराव बढ़ता ही जा रहा है।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को प्रभावी तरीके से चलाने के लिए तमाम कर्मियों को संविदा के आधार रखा गया है।
वर्तमान में अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी, लेखा सहायक, कंप्यूटर आपरेटर, तकनीकी सहायक विभिन्न मांगों को लेकर कलमबंद हड़ताल पर हैं। इसका असर योजना पर पड़ रहा है। जिले में मनरेगा का कामकाज लगभग ठप हो चुका है। इसके मद्देनजर विभागीय अफसरों पर काम प्रारंभ करने का दबाव बढ़ता ही जा रहा है। मुख्य विकास अधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार ने हड़ताली कर्मियों को द्वितीय नोटिस जारी कर दिया है। इसमें कहा गया कि 22 अक्तूबर को हड़ताल अवधि का मानदेय नहीं दिए जाने के संबंध में अवगत कराया जा चुका है। इसके बाद भी कर्मचारी हड़ताल से वापस नहीं लौटे हैं जो सेवा शर्तो का खुला उल्लंघन है। मनरेगा की खराब प्रगति पर अपर आयुक्त ने रोष प्रकट किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दो दिन के अंदर मनरेगा कर्मी अपने-अपने विकासखंडों में योगदान करते हुए अपना कार्य प्रारंभ नहीं करते हैं तो अनुबंध समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी। मनरेगा कर्मियों के हड़ताल समाप्त नहीं करने से अब अफसर कोई भी रियायत बरतने के मूड में नहीं है। इससे दोनों में तल्खी बढ़ती जा रही है।