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Lalitpur News: चूल्हे के धुएं में उज्जवला योजना तोड़ रही दम

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अमर उजाला ब्यूरो
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ललितपुर-सिलावन। कई घरों में चूल्हे के धुएं में उज्जवला योजना दम तोड़ रही है। गैस सिलिंडर भराने का खर्च वहन नहीं कर पाने से अधिकतर उपभोक्ता योजना का लाभ नहीं उठा रहे हैं। हालात यह है कि किसी ने अपने पैसे से चार साल तो किसी ने दो साल से गैस सिलिंडर नहीं भरवाया। ज्यादातर लाभार्थी लकड़ी के चूल्हे पर ही खाना बना रही हैं। सरकार इन उपभोक्ताओं को तीन माह में एक सिलिंडर फ्री दे रही है। उसी से ये लोग जरूरत पड़ने पर काम चला लेते हैं।
लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने के कारण महिलाओं के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता था। इससे मुक्ति दिलाने के लिए एक मई 2016 को सरकार ने गरीब महिलाओं के लिए उज्जवला योजना शुरू की थी। इसके तहत निशुल्क गैस कनेक्शन दिए गए। विकास खंड महरौनी में भी अनेक महिलाओं को इसका लाभ मिला। बावजूद इसके कई उपभोक्ता सिलिंडर नहीं भरवा पा रहे हैं। अधिकतर मामलों में गरीबी सिलिंडर भरवाने के आड़े आ रही है। बोरी में रखे सिलिंडर को निकालते हुए छपरट गांव निवासी हरकुंवर बताती हैं कि चार साल पहले गैस सिलिंडर तो फ्री मिल गया था, लेकिन सिलिंडर काफी महंगा होने के कारण उसे भरवाने का सामर्थ नहीं था। भरवाने की स्थिति नहीं होने के कारण लकड़ी पर ही खाना बनाती हैं।
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ऐसे ही कुसुम का कहना है कि गैस सिलिंडर के दाम अधिक होने के कारण दो साल से सिलिंडर नहीं भरवाया है। जंगल में आसानी से लकड़ी मिल जाती है, इसलिए लकड़ी के चूल्हे पर ही खाना बनता है। समोगर गांव निवासी मंजनाबाई का सिलिंडर दूसरे ही इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं सीता ने भी चार साल से सिलिंडर नहीं भरवाया। बताती हैं कि सिलिंडर भरवाने से कहीं कम खर्च में लकड़ी पर भोजन बन जाता है। इनके जैसे कई लाभार्थी हैं, जिन्होंने उज्जवला योजना में मिले सिलेंडर को दोबारा नहीं भरवाया।
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जनपद में हैं 1.94 लाख कनेक्शन
जनपद में उज्जवला योजना के तहत एक लाख 94 हजार 756 कनेक्शन दिए गए थे। अक्तूबर से लेकर दिसंबर तक उज्जवला योजना के तहत लाभार्थियों को एक रिफिल फ्री दिया जा रहा है। इसके बाद दूसरा रिफिल जनवरी से मार्च के बीच में दिया जाएगा। वर्तमान में अधिकांश उपभोक्ताओं ने इस योजना का लाभ प्राप्त कर लिया है। बाकी उपभोक्ता, जिनका ईकेवाईसी नहीं हुआ है, उन्हें लाभ नहीं मिल पाया है। वर्तमान में इस योजना के तहत कितने लोगों ने फ्री रिफिल नहीं लिया है, इसका डाटा एलपीजी कंपनियों से मांगा जा रहा है।
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एलपीजी कंपनी के साथ बैठक के बाद लाभार्थियों की संख्या के विषय में पूर्ण जानकारी दी जा सकती है।-उमेश चंद्र मिश्रा, जिला पूर्ति अधिकारी
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