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मजबूर हैं मजदूर, दो वक्त के रोटी के पड़ने लगे लाने

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ेतों में काम करतीं महिलाएं - फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के दिन जनपद में कई मजदूरों को काम मिला तो बहुत से मजदूरों के चेहरे पर मायूसी रही। लॉकडाउन के कारण उन्हें कोई काम नहीं मिला। शुक्रवार को अनेक मजदूरों को कहीं कोई काम नहीं मिलने से उनके चेहरे पर मायूसी रही।
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अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस, लाखों मजदूरों के परिश्रम, दृढ़ निश्चय और निष्ठा का दिन है। एक मजदूर देश के निर्माण में बहुमूल्य भूमिका निभाता है और उसका देश के विकास में अहम योगदान होता है। किसी भी समाज, देश, संस्था और उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों की अहम भूमिका होती है। मजदूरों के बिना किसी भी औद्योगिक ढांचे के खड़े होने की कल्पना नहीं की जा सकती है। इसलिए श्रमिकों का समाज में अपना स्थान है।
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- दिहाड़ी मजदूरों का हाल - बेहाल
जहां कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में लॉकडाउन है, वहीं जनपद में दिहाड़ी मजदूरों के सामने घर चलाने की बहुत बड़ी चुनौती है। दिहाड़ी मजदूरों को अभी कोई काम नहीं मिल रहा है, जिससे वह परेशान हैं। दिहाड़ी मजदूरों का कहना है कि उनके पास जितना कुछ था। वह अभी तक रहे लॉकडाउन में सब खत्म हो गया है। अब ऐसे में उन्हें घर चलाने में बहुत परेशानी हो रही है। अगर सरकार कुछ राहत के रूप में एक हजार रुपये भी दे, तो उससे पूरे एक का खर्चा नहीं चल सकता है।
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- दूसरी पाली की ड्यूटी का समय बदला जाए
आशीष अहारिया ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर सफाई कर्मचारियों के द्वितीय पाली की ड्यूटी के समय में परिवर्तन करने की मांग की। उन्होंने बताया कि नगर पालिका एवं नगर पंचायत में तैनात सफाई कर्मचारियों की द्वितीय पाली की ड्यूटी दोपहर एक से पांच बजे तक है, उस समय धूप ज्यादा होती है। मांग की गई कि सफाई कर्मचारियों के द्वितीय पाली की ड्यूटी का समय दोपहर एक से बढ़ाकर तीन बजे किया जाए।
घर बनाने के लिए ईंट - गुम्मा की भट्टी लगा रहें हैं। हम स्वयं काम कर रहे हैँ और गांव के कुछ लोगों को मजदूरी पर भी लगाएं हैं। इस साल कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन हुआ। इससे अनेक मजदूरों के सामने समस्याएं आ गईं।
- मथु प्रजापति
ईंट- गुम्मा बनाने के लिए मिट्टी में काम कर रहे हैँ, ऐसे समय में मजदूरी मिलना मुश्किल की बात है। इसलिए कुछ दिन के लिए खर्च चलाने के लिए यहीं काम ढ़ूंढ़ लिया है।
- भागीरथ
लॉकडाउन के बाद से मजदूरी नहीं मिलने से परेशान थे। लेकिन, पास में ही एक जगह काम लगा, जहां पर हम मजदूरी कर रहे हैं।
- इस्लाम
मजदूरी करना मजबूरी है, अगर नहीं करेंगेे तो घर का खर्चा नहीं चल पाएगा। इसलिए मजदूरी कर रहे हैं। गांव में काम करने को मिल गया, जिससे कुछ दिनों के खाने की व्यवस्था हो गई है।
- मोहन
हमारा चूल्हा मजदूरी से ही जलता था, लेकिन अब मजदूरी भी नहीं मिल रही है। ऐसे में दो वक्त की रोटी बनाने में भी परेशानी हो रही है।
- भागवती
लॉकडाउन होने के बाद से हमारी स्थिति बहुत खराब हो गई है। पहले श्रमिक चौराहे पर खड़े होने के बाद कहीं न कहीं मजदूरी मिल जाती थी। लेकिन अब मजदूरी नहीं मिलने से बहुत परेशान हैं।
- राजू
पहले मजदूरी करके अपने परिवार का भरण - पोषण करते थे। लेकिन, अब मजदूरी नहीं मिलने से परेशानी हो रही है।
- रामा
मजदूरों के लिए सरकार द्वारा खाद्यान और एक- एक हजार रुपये राहत राशि के तौर पर मुहैया कराए जा रहे हैं। हमें मजदूरों की चिंता है, इसलिए श्रम विभाग की ओर से हमने कई बार अनेक गांव में पंजीकरण शिविर भी लगाए और लॉकउाउन के बाद फिर मजदूरों के पंजीकरण होंगे।
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- मनोहरलाल पंथ, श्रम एवं सेवायोजन राज्यमंत्री
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