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Lalitpur News: गर्मी से दो सैकड़ा चमगादड़ मरे

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अमर उजाला ब्यूरो
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ललितपुर। जाखलौन और दैलवारा में बृहस्पतिवार को दो सैकड़ा से अधिक चमगादड़ बरगद और आम के पेड़ के नीचे मरे मिले। वन विभाग की टीम ने चमगादड़ों का पोस्टमार्टम कराया। पशु चिकित्सक ने प्रथमदृष्टया हीट वेव से मरने की आशंका जताई है। वन विभाग ने विस्तृत जांच के लिए पक्षियों का सैंपल आरबीआरआई बरेली व भोपाल स्थित लैब भेजा है।
सुबह जाखलौन क्षेत्र के मोहल्ला तैलयापुरा स्थित प्राचीन बरगद के पेड़ के नीचे काफी संख्या में चमगादड़ मरे दिखाई दिए। ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। वन विभाग व पशु चिकित्सकों की टीम मौके पर पहुंची। वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि सुबह अचानक चमगादड़ों की चहचहाहट सुनाई दी, इसके बाद शांति हो गई। उजाला होने पर जब सुबह देखा तो वहां चमगादड़ मरे पड़े थे। इधर, दैलवारा में पुराने आम पेड़ के नीचे भी पचास से अधिक चमगादड़ मरे मिले। चिकित्सकों ने चमगादड़ों की मौत का कारण हीट वेव माना है। उन्होंने बताया कि चमगादड़ अधिक गर्मी सहन नहीं कर पाते हैं। इसलिए यह पुरानी इमारतों व घने पेड़ों में अंधेरे वाली जगहों पर रहते हैं। दो दिनों से अधिक तापमान के कारण यह मरे हैं।
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जाखलौन और दैलवारा में चमगादड़ मरे पाए गए हैं, उनका पोस्टमार्टम कराया गया है। चिकित्सक इनकी मौत का कारण हीट वेव बता रहे हैं।
सिरीन सिद्दकी, उपप्रभागीय सामाजिक वानिकी।

चार दिनों में तापमान बढ़ने के कारण पशु पक्षियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। चमगादड़ों की मौत के अन्य कारण जानने के लिए चमगादड़ों का शव भारतीय पशु चिकित्सा संस्थान (आरबीआरआई) बरेली व राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान भोपाल भेजा रहा है। -गौतम सिंह, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी।
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