ललितपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को
आगे बढ़ाने में ग्राम प्रधान रुचि नहीं ले रहे हैं। इसका खुलासा ग्राम
पंचायतों में कराए जा रहे कार्यों के चिह्निकरण में हुआ है। स्थिति यह है
कि जिले में दो दर्जन से ज्यादा ग्राम पंचायतों में काम ठप पड़ा है।
श्रमिकों
को स्थानीय स्तर पर रोजगार देने के उद्देश्य से मनरेगा योजना चलाई जा रही
है। इसके अंतर्गत जॉब कार्डधारकों को साल भर में 100 दिन का रोजगार मुहैया
कराने का प्रावधान किया गया है। परंतु, वर्तमान वित्तीय वर्ष में अनेक
ग्राम पंचायतें मनरेगा के कार्यों में दिलचस्पी नहीं दिखा रही हैं, जिससे
ग्राम स्तर पर कार्य प्रारंभ नहीं हो पा रहे हैं। इसका विपरीत प्रभाव
श्रमिकों पर पड़ रहा है। कइयों ने तो काम के अभाव में महानगरों की ओर रुख
करना शुरू कर दिया है, जिससे जिला प्रशासन परेशान है।
जिलाधिकारी
जुहेर बिन सगीर ने काम कराने वाली ग्राम पंचायतें व उदासीन ग्राम पंचायतों
के चिह्निकरण के निर्देश दिए थे। इसमें 30 ग्राम पंचायतें उदासीन निकलकर
आई हैं। इनमें ब्लाक मड़ावरा की ग्राम पंचायत कुर्रट, मड़ावरा, पटना
मड़ावरा, रनगांव, उल्दनाखुर्द, ब्लाक बिरधा की ग्राम पंचायत उत्तमधाना,
टीकरातिवारी, ठगारी, टेनगा, ब्लाक बार की ग्राम पंचायत खजरा, मोगान,
सुनवाहा, सूरीकलां, टोरी, ब्लाक जखौरा की ग्राम पंचायत मैनवारा,
मसौराखुर्द, निवाई, पटौराकलां, तिलहरी, ब्लाक तालबेहट की ग्राम पंचायत मऊ,
रामपुर, सेरवासकलां, सुनौरी, तेरई और ब्लाक महरौनी की ग्राम पंचायत
बुदनीमड़ावरा, अमौरा, भदौरा, छपरट व सड़कौरा शामिल है। इससे मनरेगा की
हकीकत उजागर हो गई है। अब जिला प्रशासन ने ऐसी ग्राम पंचायतों पर शिकंजा
कसना प्रारंभ कर दिया है।