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दस की जगह ठूंसे जा रहे बीस बच्चे

Tue, 25 Apr 2017 12:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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auto - फोटो : demo
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स्कूलों से बच्चों को ले जाने वाले टैक्सी चालकों को नौनिहालों की जान की परवाह नहीं है। वह नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। टैक्सी में क्षमता से दोगुनी संख्या में बच्चों को बैठा कर ले जाया जा रहा है। इन्हें रोकने के लिए न तो अफसरों को सुध है और न ही अभिभावकों को फिक्र।
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शहर के सिविल लाइन क्षेत्र में संचालित निजी स्कूलों के बच्चों को स्कूल छोड़ने और घर छोड़ने वाले टैक्सियों के चालक बारह से सोलह बच्चों को एक ही टैक्सी में बैठाए रहते हैं। कई बार तो यह संख्या बीस तक पहुंच जाती है। जबकि, नियम दस बच्चों को बैठाने का है। इससे कभी भी हादसा हो सकता है। प्रशासन की इतनी रियायत के बाद भी टैक्सी चालकों की मनमर्जी खत्म नहीं हो रही है और न ही नियमों का पालन किया जा रहा है।
इसके पीछे अभिभावकों की उदासीनता भी बहुत बड़ी वजह है। बच्चों को जरा सी चोट लगने पर जिन माता-पिता का कलेजा दहल जाता है। वह अपने दिल के टुकड़ों के जीवन के साथ हो रहे ऐसे खिलवाड़ को क्यों झेल रहे हैं। अभिभावकों द्वारा भी टैक्सी चालकों का विरोध नहीं किया जाता है। अभिभावकों को इस बात को अनदेखा नहीं करनी चाहिए। यातायात उपनिरीक्षक नासिर अली ने कहा कि अभियान चलाकर नियमविरुद्ध स्कूली वाहनों को पकड़ा जाएगा। क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने वाले ऑटो चालकों पर कार्रवाई की जाएगी।
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टैक्सी में जाली लगाने के थे निर्देश  
एक टैक्सी में अधिकतम 10 बच्चों को बैठाने की अनुमति देते समय यह शर्त रखी गई थी कि टैक्सी चालक बच्चों की सुरक्षा क ी अनदेखी नहीं करेंगे। इसके बावजूद मनमानी जारी है। स्कूल टैक्सियों में बच्चों की सुरक्षा के लिए दोनों ओर जालियां लगाने और प्रत्येक टैक्सी पर विद्यालय का नाम अंकित रहेगा और बच्चों के बैग रखने के लिए टैक्सी के ऊपर स्टैंड बनाने के निर्देश दिए थे।
                                 
यातायात माह तक ही सीमित है कार्रवाई                        
मनमर्जी कर रहे इन स्कूल टैक्सी चालकों के खिलाफ कार्रवाई की याद यातायात पुलिस व जिम्मेदार अधिकारियों को केवल यातायात माह नवंबर के दौरान ही आती है। इस एक माह विद्यालयों में जागरूकता अभियान व विशेष चेकिंग अभियान चलाया जाता है। शहर में करीब डेढ़ हजार से अधिक टैक्सियां शहर की सड़कों पर दौड़ती है, लेकिन किसी भी टैक्सी में सुरक्षा के इंतेजाम नहीं है कि सवारी दायीं और नहीं उतर सके।                        
                    
              
नहीं चेत रहा प्रशासन
बीते दिनों जिला एटा में स्कूली बच्चों से भरी एक बस पलट गई थी, जिसमें कई मासूमों की जान चली गई थी। उक्त घटना से जिला प्रशासन व यातायात पुलिस अधिकारियों ने अब तक कोई सबक नहीं लिया है। शहर में सुरक्षा गाइड लाइन की लगातार अनदेखी की जा रही है।
- कृष्णा तोमर
          
बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़
शहर में टैक्सी चालकों द्वारा की जा रही मनमानी से बच्चों का जीवन खतरे में रहता है। इसको रोकने के लिए पुलिस व जिला प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए और अभियान चलाना चाहिए। अभिभावक भी बढ़ चढ़कर उनका साथ देंगे।
राजेश दुबे, अधिवक्ता       

वर्जन
खिलवाड़ बर्दास्त नहीं
पहले भी अभियान चलाकर ऑटो चालकों पर कार्रवाई होती रहती है। प्रशासन की ओर से दस बच्चों को बैठाने की अनुमति दी गई है। इससे अधिक बच्चे बैठाए जाएंगे तो कार्रवाई की जाएगी।
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- सोमलता यादव, एआरटीओ प्रवर्तन       
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