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अहंकार और लालसा से मुक्ति में है सच्चा आनंद : मुनि

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महरौनी। मुनि गुरुदत्त सागर महाराज ने कहा कि व्यक्ति जब अपने अहंकार, लालच और लालसा से मुक्त होता है तभी वह सच्चे आत्मिक आनंद और शांति को अनुभव कर सकता है। त्याग केवल सांसारिक वस्तुओं को छोड़ना नहीं है, बल्कि मन, वचन और कर्म में भी आसक्ति और मोह का त्याग करना आवश्यक है। वह बृहस्पतिवार को दिगंबर जैन मंदिर में उत्तम त्याग धर्म पर प्रवचन दे रहे थे।
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मुनि मेघदत्त सागर महाराज ने बताया कि उत्तम त्याग धर्म का अभ्यास जीवन में सभी अनावश्यक इच्छाओं और मोह को कम करता है और यह मोक्ष प्राप्ति का सर्वोत्तम मार्ग है। त्याग के माध्यम से व्यक्ति न केवल स्वयं शुद्ध होता है, बल्कि समाज में भी सद्भाव, करुणा और संतुलन स्थापित होता है। इस अवसर पर रश्मि मलैया के निर्देशन में रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। विद्यार्थियों ने रंगोली के माध्यम से संयम, सेवा और आध्यात्मिक चेतना को प्रदर्शित किया। प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया।
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