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सूदखोर से परेशान वृद्धा ने फंदा लगाकर दी जान: जमीन मुक्त कराने को प्रशासन से गुहार लगाकर कही थी सुसाइड की बात

Tue, 07 Oct 2025 10:01 PM IST
दीपक महाजन संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर

सार

वृद्धा ने अपने पति के साथ प्रशासन से सूदखोर के चंगुल से जमीन मुक्त कराने को लेकर गुहार लगाई थी। सुनवाई न होने पर आत्महत्या की बात भी कही थी। इधर, सूदखोर लगातार जमीन पर निर्माण कर रहा था, कार्रवाई होती न देख वृद्धा ने यह कदम उठा लिया।
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बुजुर्ग महिला जगरानी - फोटो : संवाद
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विस्तार
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सूदखोर के चंगुल में फंसी बुजुर्ग महिला ने पेड़ पर फंदा लगाकर अपनी जान दे दी है। महिला ने अपने पति के साथ सूदखोर से अपनी जमीन को मुक्त कराने के लिये दो दिन पहले जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को प्रार्थना पत्र सौंप कर कार्रवाई की मांग की थी। पीड़ित दंपती ने सुनवाई न होने पर फंदा लगाकर मौत को गले लगाने की बात की थी। इसके बाद भी मामले में संज्ञान नहीं लिया गया। निराश वृद्धा ने मंगलवार को फंदे पर लटक कर अपनी जान दे दी।
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कोतवाली महरौनी के ग्राम पठा विजयपुरा निवासी दंपत्ती हरदयाल ने अपनी पत्नी 80 वर्षीय जगरानी को साथ में लेकर जिला प्रशासन व पुलिस कार्यालयों में पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई थी। दंपती ने शिकायती पत्र देते हुए बताया था कि गांव का ही सूदखोर उसकी जमीन पर जबरन कब्जा किए हुए है। दंपत्ति ने बताया था कि उन्होंने ली गई धनराशि मय ब्याज के सूदखोर को लौटा दी है। लेकिन सूदखोर जमीन से कब्जा नहीं छोड़ रहा है। बुजुर्ग महिला व उसके पति ने न्याय न मिलने पर फंदा लगाकर आत्महत्या करने की भी बात उच्चाधिकारियों से की थी। इसके बाद भी शिकायती पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं की गई और सूदखोर कब्जा की गई जमीन पर लगातार निर्माण कार्य करवा रहा था। जिसका नतीजा यह रहा कि बुजुर्ग महिला जगरानी मंगलवार को उक्त जमीन पर पहुंची। यहां उसने अमरूद के पेड़ पर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। बुजुर्ग महिला के आत्महत्या करने से गांव में हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।


मूलधन से चार गुना रूपये लेने के बाद भी जमीन नहीं छोड़ी

हरदयाल ने बताया था कि उसने एक व्यक्ति से तीन रुपये प्रति सैकड़ा ब्याज की दर पर 80 हजार रुपये करीब पंद्रह साल पहले लिए थे। इसके चार साल बीतने के बाद उसने पूरा रुपया मय ब्याज के चुकता कर दिया था। लेकिन विपक्षी अतिरिक्त रुपये की मांग करने लगा और ब्याज के रुपये लेने का दबाव बनाने लगा था। जबकि हरदयाल मूलधन से चार गुना अधिक रुपया लौटा चुका था। पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी ने ट्रैक्टर, ट्रॉली, बोनी मशीन, पंजा और आठ एकड़ जमीन को रुपये के लेन-देन का ब्याज का रुपये चुकाने के एवज में गुमराह व धोखाधड़ी से ले लिया था। मूलधन से चार गुना रुपये अधिक लेने के बाद भी जमीन से कब्जा नहीं छोड़ा।
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बुजुर्ग दंपती दो दिन से काट रहे थे अधिकारियों के चक्कर

हरदयाल ने 5 अक्तूबर को प्रभारी निरीक्षक कोतवाली महरौनी और उपजिलाधिकारी महरौनी को शिकायती पत्र दिए थे। 6 अक्तूबर को पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र दिया था। कार्रवाई न होता देख निराश होकर बुजुर्ग महिला ने दर्दनाक कदम उठाते हुये अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।


मृतका के पुत्र ने दी तहरीर

मृतका जगरानी के पुत्र हरीराम कुशवाहा ने महरौनी पुलिस को शिकायती पत्र दिया। जिसमें बताया कि मंगलवार की सुबह विपक्षियों ने एकराय होकर उसकी जमीन पर बीम डालकर दीवार बनाने लगे। इस पर उसने व उसकी मां जगरानी सहित पिता हरदयाल ने विपक्षी से कहा कि उनकी जो जमीन गिरवी रखी थी वह उन्होंने 80 हजार रुपये मय ब्याज के साथ आठ लाख रुपये चुकता कर दिया है। लेकिन जमीन वापस नहीं की गई। इस बात पर विपक्षी भड़क गए थे और मां को धक्का दे दिया था। पिता को गाली दी थी। वह जान बचाकर महरौनी गया। जबकि उसकी मां खेत पर ही रही। इस घटना से उसकी मां घबरा गई और वह काम कर रहे मजदूरों के सामने अमरूद के पेड़ पर फंदा से लटक कर आत्महत्या कर ली।


इस मामले में महरौनी एसडीएम रजनीश का कहना है मेरे पास रविवार को पीड़ित की शिकायत आयी थी। मैंने कोतवाली भेज दी थी। पुलिस गांव में गयी थी। लेकिन पीड़ित पक्ष फिर मेरे पास सोमवार को आया तो मैंने दोनों पक्षों को आज मंगलवार को दिन में दो बजे कोतवाली बुलाया था। दोनों पक्ष कोतवाली आये थे मैं भी पहुंच गया था लेकिन इसी दौरान खबर आई कि महिला ने आत्महत्या कर ली है। इस पर सभी लोग वापस लौट गए। जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे उसी हिसाब से कार्रवाई होगी।
 

महरौनी उपाधीक्षक आशीष कुमार का कहना है कि पीड़ित की तहरीर पर मुकदमा लिखा जा रहा है। महिला की मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर ही स्पष्ट होगा। राजस्व विभाग भी जांच कर रहा है।
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