ललितपुर/धौर्रा। गांव धौर्रा क्षेत्र के सैकड़ों आदिवासी महिलाओं और पुरुषों ने पदयात्रा निकालकर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी की और वन अधिकार अधिनियम के तहत वन क्षेत्र में कृषि भूमि का पट्टा देने की मांग की।
आदिवासियों ने बताया कि सरकार ने वन अधिकार अधिनियम 2006 पारित किया था। इसमें उन्हें क्षेत्र में कृषि भूमि के पट्टे देने का प्रावधान किया था। वर्ष 2012 में स्थानीय वन कमेटियों द्वारा जनपद के कृषि भूमि पट्टे को प्रस्ताव बनाए गए थे। जो दस वर्ष से विचाराधीन चल रहे थे। कुछ दिनों पूर्व सोनभद्र व मिर्जापुर में शासन ने इसी अधिनियम के तहत आदिवासियों को पट्टे दे दिए।
जब उन्होंने ललितपुर में पट्टे देने की मांग की तो अधिकारियों ने प्रस्तावित पट्टों को निरस्त कर दिया। इसको लेकर आलाधिकारियों से कई बार मांग की। लेकिन सुनवाई नहीं की गई। आदिवासियों ने राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेजा गया। जिसमें मांगों को लेकर एक दिसबंर को जिला मुख्यालय तक पैदल यात्रा और धरना प्रदर्शन करने की बात कही। धरना प्रदर्शन के दौरान यशपाल सिंह परिहार, ग्राम प्रधान मादौन सुदामा प्रसाद मिश्रा, ग्राम प्रधान भारौन देवी सहरिया मौजूद रहे।
वन विभाग पर लगाए आरोप
प्रदर्शन में शामिल ग्राम कपासी निवासी आदिवासी महिला शांति बाई ने बताया कि उसने अपनी भूमिधर जमीन पर गेहूं की फसल बोई थी। वन विभाग के अफसरों ने उसकी फसल में दवा डाल दी। जिससे फसल नष्ट हो गई। इसको लेकर भी आदिवासियों में आक्रोश व्याप्त था।