आचार संहिता के कुछ घंटे पहले शिक्षा विभाग में हुए दर्जनों शिक्षकाें के तबादले शुुरू से ही सवालों के घेरे में है। जिस तरीके से जल्दबाजी में यह तबादले हुए हैं, उनसे कई स्कूलों में ताले लगाने की नौबत आ गई है। तबादले का सबसे अधिक प्रभाव मड़ावरा ब्लाक के दर्जनों स्कूलों का करना पड़ रहा है।
ब्लॉक मडावरा के अंतर्गत 146 प्राथमिक और 76 उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हो रहे है। चार जनवरी को बीएसए द्वारा 199 शिक्षकों के तबादले किए गए, जिनमें से 77 शिक्षक मड़ावरा तहसील के हैं। जबकि, यहां पर केवल छह शिक्षकों को भेजा गया है। मड़ावरा ब्लॉक के सबसे दूरवर्ती ग्राम लखंझर की बात की जाए तो वहां पर एक प्राथमिक और एक उच्च प्राथमिक विद्यालय है। लेकिन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की स्थानांतरण की नीति के बाद से उच्च प्राथमिक विद्यालय में ताला लग गया है। वहीं वनगुंआ के उच्च प्राथमिक विद्यालय में भी ताला लगने के साथ-साथ प्राथमिक विद्यालय को मात्र शिक्षामित्रों के भरोसे चलाकर, बच्चों के भविष्य को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।
पिछले दिनों ग्राम ठनगना में खुमान और वनगुंवा में शुभम जैन को प्रशासनिक तौर पर स्थानांतरित किया गया था। इन दोनों अध्यापकों ने अपने अपने तैनाती वाले गांवों में तैनाती भी ले ली थी, लेकिन हफ्ते भर में कुछ ऐसा हुआ कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने दोनों को दूसरे ब्लाकों के विद्यालयों में स्थानांतरित कर दिया। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा किए जा रहे मनमाने स्थानांतरणों पर रोक लगा कर बंद होने की कगार पर खडे़ विद्यालयों को खुलवाया जाए, जिससे बच्चों का भविष्य खराब होने से बच सके।
तहसील मड़ावरा के जिन विद्यालयों में शिक्षकों की कमी हुई है, वहां पर अंर्तजनपदीय तबादलों के तहत आए शिक्षकों को तैनात किया जाएगा। तैनाती के लिए चुनाव आयोग से अनुमति के लिए पत्र लिखा जा रहा है।
- संतोष राय, बेसिक शिक्षा अधिकारी