ललितपुर। यातायात माह चल रहा है। शहर में आए दिन लगने वाले जाम से निजात पाने के लिए वन- वे ट्रैफिक लागू करने की कोशिशें हो रही हैं, लेकिन रेलवे स्टेशन क्षेत्र में टैक्सी संचालकों द्वारा यातायात माह की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। स्थिति यह है कि यहां पर टैक्सी संचालक मनमाने तरीके से खड़े होते हैं, जिससे यात्रियों का रेलवे स्टेशन से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है।
गत वर्ष इसी यातायात माह में टैक्सी संचालकों को निर्धारित कॉलम में टैक्सी खड़ी करने की व्यवस्था की गई थी। ऐसे में तय है कि यातायात माह के दौरान हर साल ट्रैफिक कंट्रोल करने की कवायद शुरू होती है और यातायात माह निकलने के बाद सब ढर्रे पर आ जाता है। यातायात पुलिस द्वारा जिले भर में जगह - जगह यातायात नियमों का पालन करने का पाठ पढ़ाया जा रहा है। स्कूलों में बच्चों को शपथ दिलाई जा रही है। शहरवासियों को नियमों से वाहन चलाने व उनका पालन करने के लिए शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। यह परंपरा लगभग हर वर्ष मनाई जाती है। यातायात माह शुरू होते हुए स्कूल, कॉलेज, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर यातायात विभाग द्वारा संबंधित विभागों के सहयोग से यातायात पाठशाला लगाई जाती है और रैलियां निकालकर नियमों के पालन का संदेश भी दिया जाता है।
एक वर्ष पूर्व यातायात माह के दौरान ही परिवहन विभाग, यातायात पुलिस और राजकीय रेलवे पुलिस के सहयोग से रेलवे स्टेशन के बाहर परिसर में बेतरतीब टैक्सियों को नियंत्रित करने के लिए निर्धारित स्थान पर कॉलम (सीमा रेखा) बनाकर उसी कालम के अंदर रुकने की व्यवस्था की गई थी। इस व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए जीआरपी इंस्पेक्टर द्वारा दो सिपाही पिकेट की व्यवस्था भी दी गई थी, ताकि टैक्सियां निर्धारित कॉलम में ही खड़ी हों। इस व्यवस्था को लोगों ने काफी पसंद किया था, क्योंकि तब रेलवे स्टेशन से निकलने वाले यात्रियों के सामान की छीना झपटी बंद हो गई थी और यात्री इत्मीनान से टैक्सी के पास आ जाते थे।
शुरूआत में यह व्यवस्था काफी लोकप्रिय हुई थी, जिसमें टैक्सियां निर्धारित कॉलम में ही खड़ी होती थीं। लेकिन, कुछ समय के बाद सब कुछ पुराने ढर्रे पर आ गया और टैक्सियां फिर से बेतरतीब तरीके से खड़ी होने लगीं, जिससे अपने वाहनों से रेलवे स्टेशन पहुंचने वाले या फिर जीआरपी की ओर रेलवे कॉलोनी जाने वाले राहगीरों को निकलने में परेशानी होने लगी है। यहां तक कि ट्रेन के आने के समय टैक्सियां इतनी बेतरतीब तरीके से खड़ी हो जाती हैं कि पैदल चलने वाले राहगीरों का निकलना भी मुश्किल हो जाता है।
वहीं, रेलवे स्टेशन के बाहर स्थित होटलों व रेस्टोरेंट के पास टैक्सियों का जमावड़ा लगने से भी राहगीरों को परेशानी झेलनी पड़ती है। यदि टैक्सी संचालकों की मनमानी पर यातायात माह में ही पालन नहीं कराया जा पा रहा है, तो अन्य दिनों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
मुख्य गेट पर होता है टैक्सियों का कब्जा
ललितपुर। रेलवे स्टेशन के बाहर मुख्य गेट पर ही टैक्सी संचालकों द्वारा बेतरतीब टैक्सियां खड़ी कर कब्जा कर लिया जाता है। ट्रेन आने पर सवारियों को लेने के लिए मुख्य गेट की रेलिंग पर टैक्सी ड्राईवर लाइन लगाकर खड़े हो जाते हैं, जिससे यात्रियों को निकलने में भी परेशानी होती है। टैक्सी संचालकों की मनमानी से यात्रियों को परेशानियों से जूझना पड़ता है।
इनका कहना है---
एक वर्ष पूर्व रेलवे स्टेशन के बाहर टैक्सियों के खड़े करने के लिए निर्धारित कॉलम व्यवस्था एआरटीओ द्वारा बनाई गई थी, जिसके संचालन में यातायात विभाग व जीआरपी के संयुक्त तत्वावधान में व्यवस्था सुचारु कराई गई थी। इस व्यवस्था के संचालन के लिए जीआरपी का कमान सौंपी गई थी, जिसमें जीआरपी ने दो सिपाहियों की पिकेट ड्यूटी लगाई थी। इस बार यातायात माह में जीआरपी अधिकारियों के वार्ता कर यातायात के प्रति जागरूकता के लिए अभियान चलाया जाएगा।
- नीरज दीक्षित
यातायात प्रभारी
इनका कहना है---
एआरटीओ द्वारा रेलवे स्टेशन के बाहर 30 टैक्सियों के लिए कॉलम व्यवस्था की गई थी, जबकि शहर में दो हजार से अधिक टैक्सियां संचालित हो रही हैं। 60 प्रतिशत टैक्सियां यहां एक साथ आ जाती हैं, जिससे समस्या होती है। खासकर टीकमगढ़ पैसेंजर व बीना पैसेंजर के समय पर अधिक समस्या होती है। ऐसे में एक साथ टैक्सियां एकत्रित होने पर व्यवस्थित कराने का प्रयास किया जाता है। यहां टैक्सियों के व्यवस्थित रुप से संचालित करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है और न ही रेलवे द्वारा ही यहां चार पहिया वाहनों व टैक्सियों के लिए अलग से स्टैंड की व्यवस्था की गई है।
- शेरपाल सिंह
प्रभारी थाना प्रभारी, जीआरपी