ललितपुर। चांदपुर-जहाजपुर में देवगढ़ की तर्ज पर जैन मंदिर का निर्माण किया जाएगा, जहां छह वर्ष पूर्व बेतवा नदी से निकाली गई भगवान श्रेयांशनाथ भगवान की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। वहीं, ट्रेन यात्रियों के दर्शनार्थ शांतिनाथ भगवान की लगभग 21 फुट ऊंची मूर्ति भी स्थापित होगी। यात्रियों के लिए धर्मशाला, आश्रम के साथ के शिक्षा व स्वास्थ्य की व्यवस्था होगी।
देवगढ़ में जैन धर्म के भगवान की सैकड़ों मूर्तियों को मंदिरों में स्थापित किया गया है। चांदपुर जहाजपुर में भी सनातन और जैन धर्म के संबंधित सातवीं से तेरहवीं शताब्दी पुरानी विशाल हजारों मूर्तियां व चबूतरे हैं। यहां जैन धर्म का एक मंदिर भी है, जहां जैन मुनि ठहरकर तपस्या करते हैं और उनके शिष्य एवं जैन समुदाय के लोग मंदिर में भगवान शांतिनाथ को देखने आते हैं। यह धरोहरें पुरातत्व विभाग के अंतर्गत संरक्षित हैं। लेकिन अब यहां पास में ही जैन मंदिर समिति द्वारा देवगढ़ की तर्ज पर विशाल जैन मंदिर निर्माण कराए जाने की योजना तैयार की गई है। इसके लिए मंदिर समिति द्वारा इसी मंदिर के पास रेलवे लाइन से कुछ दूरी पर छह एकड़ जमीन भी खरीदी गई है। पुरातत्व विभाग के नियमों के अनुरूप मंदिर की स्थापना की जाएगी।
छह वर्ष पूर्व निकाली गई मूर्ति चांदपुर में रखी है
आचार्य सुदर्शन महाराज यहां चातुर्मास कर चुके हैं और उन्होंने करीब छह वर्ष पूर्व श्रीरणछोरधाम के पास से निकली बेतवा नदी से भगवान श्रेयांशनाथजी की एक प्रतिमा निकाली थी। लोगोें की मान्यता है कि सुदर्शन महाराज को सपना आया था कि उन्हें बेेतवा नदी से श्रेयांशनाथ भगवान की मूर्ति निकालना है। यह मूर्ति चांदपुर में आज भी रखी हुई है और इस प्रतिमा में हिरन का चिह्न बना हुआ है और यह खंडित भी नहीं है। इस प्रतिमा को भी नए बनाए जाने वाली मंदिर में स्थापित किया जाएगा। नवीन मंदिर का निर्माण इस प्रकार से किया जाएगा, जहां श्रद्धालुओं के लिए धर्मशाला, दुकानें, त्यागी आश्रम, पार्क के साथ ही शिक्षा व स्वास्थ्य संबंधी केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे। यहां मंदिर का निर्माण दो एकड़ जमीन कराया जाएगा, जबकि बाकी जमीन में अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। वहीं मंदिर परिसर में मध्य में भगवान शांतिनाथ भगवान की लगभग 21 फुट ऊंची प्रतिमा भी स्थापित होगी, ताकि ट्रेनों से निकलने वाले जैन श्रद्धालुओं जो उपवास या नियम लेकर चलते हैं, वह ट्रेनों में से ही भगवान के दर्शन कर सकें। सुदर्शन महाराज के शिष्य नवनीत जैन चांदपुर ने बताया कि महाराजजी का ऐसा संकल्प है कि देवगढ़ की तर्ज पर यहां मंदिर का विकास हो। इसके लिए योजना बनाई गई है। इसके लिए यहां समिति द्वारा छह एकड़ जमीन खरीदी गई है।
सड़क मार्ग भी सुगम हो
चांदपुर-जहाजपुर जाने के लिए धौर्रा गांव के पहले दो रास्ते हैं। रेलवे पुल के नीचे से निकला रास्ता तो प्रशासन द्वारा डामरीकरण करा दिया गया है, लेकिन अमऊखेड़ा से होकर जाने वाला मार्ग अब भी ऊबड़-खाबड़ है। जिससे यहां श्रद्धालुओं व पर्यटकों को पहुंचने में काफी मुश्किल होती है। यदि यह मार्ग बन जाए, तो श्रद्धालुओं को चांदपुर जहाजपुर तक पहुंचने का मार्ग भी सुगम हो सकेगा।
चांदपुर-जहाजपुर में विकास के उद्देश्य से होगा मंदिर का निर्माण
चांदपुर-जहाजपुर में सातवीं शताब्दी से तेरहवीं शताब्दी की धार्मिक विरासतों का भंडार है। यह स्थान जैन धर्म के साथ ही सनातन धर्म की धार्मिक संस्कृति का बड़ा केंद्र था। जिसके गवाह आज भी सनातन धर्म के विशाल चबूतरे और उन पर व आसपास बिखरी खंडित प्रतिमाएं हैं। यहां देवगढ़ की तर्ज पर जैन मंदिर का निर्माण करने का उद्देश्य क्षेत्र के विकास को देखते हुए किया जा रहा है। यहां श्रद्धालुओं की सुविधाओं के साथ ही क्षेत्र के विकास को देखते हुए यहां हेल्थ सेंटर भी बनाया जाएगा। साथ ही शिक्षा के स्तर पर भी विकास किया जाएगा।
अरविंद जैन, अध्यक्ष चांदपुर जैन मंदिर कमेटी
चांदपुर में प्राचीन जैन मंदिर में स्थित स्तंभ- फोटो : LALITPUR
प्राचीन मंदिर में प्राचीन मूर्तिया- फोटो : LALITPUR