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जमाखोरी के कारण गुटखा के दामों में बढ़ोतरी

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महरौनी। खबर पढ़कर आश्चर्य होगा, लेकिन यह सच है कि गुटखा खाने वालों की इतनी अधिक संख्या है कि वह इसकी कालाबाजारी से परेशान हैं। तलब लगने पर गुटखा खाना उनकी मजबूरी होती है, भले ही कितना महंगा बिके। स्थिति यह है कि बाजार में फुटकर दुकानदार दस रुपये में बिकने वाला गुटखा पंद्रह रुपये में बेच रहे हैं, जबकि बीस रुपये का गुटखा मार्केट में 25 रुपये में बिक रहा है।
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थोक व्यापारियों ने गुटखा के दाम बढ़ा दिए हैं। बढ़े दामों का खामियाजा ग्राहकों की जेब पर भारी पड़ रहा है। ऐसे में छोटे दुकानदार मजबूरी में प्रिंट रेट से अधिक दामों पर बेच रहे हैं। बढ़े दामों का फायदा कुछ जमाखोर उठा रहे हैं। इससे थोक दुकानदार मालामाल हो रहे हैं और छोटे दुकानदार व ग्राहक जानबूझकर जेब कटवा रहे हैं। बाजार में माल की खपत कम होने से व्यापारी ऊंचे दामों पर माल बेचकर मुनाफा कमा लेते हैं, लेकिन नुकसान छोटे व्यापारी औऱ ग्राहक को होता है।
छोटे दुकानदारों को दस रुपये के पैकिट वाले गुटखे के इक्कीस पैकेट 175 रुपये में आते थे। लेकिन, अब 210 रुपये में आ रहे हैं। इस प्रकार 35 रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है। बीस रुपये के गुटखे के एक पैकिट में बारह गुटखा निकलते हैं, जो 185 रुपये में मिलते थे। 220 से 230 का पैकिट छोटे दुकानदारों को मिल रहा है। छोटे दुकानदार भी दस रुपये वाला गुटखा पंद्रह रुपये और बीस रुपये वाला गुटखा पच्चीस रुपये में बेच रहे हैं। ओवररेटिंग से ग्राहकों की जेब खाली हो रही है और दुकानदार मालामाल हो रहे हैं।
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गुटखा खाने की लत पड़ चुकी है। 10 रुपये में जो गुटखा का पाउच आता था, वह अब 15 रुपये में आ रहा है। मजबूरी में खरीदना पड़ रहा है।
- रईस खान
पहले 12 पाउच का पैैकेट 185 रुपये में आता था। अब 240 रुपये में आ रहा है। इससे मजबूरन 20 रुपये की जगह पाउच पच्चीस रुपये में बेच रहे हैं।
- मनोज रिछारिया
जांच कराएंगे, यदि कोई गुटखा की कालाबाजारी कर रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
- ज्ञानेश्वर प्रसाद, उपजिलाधिकारी महरौनी
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