ललितपुर। मुनि सुप्रभ सागर महाराज ने कहा कि कोई आत्मा तब तक परमात्मा नहीं बन सकती जब तक उसे संसार से विरक्ति न हो। हमें अपनी आत्मा को परमात्मा बनाने के लिए मोह का नाश करना पड़ता है। वैभव छोड़ने का दृश्य देखना है तो तीर्थंकर के समवशरण को देखो। उन्होंने कहा कि तीर्थंकर के समवशरण की विशेषता होती है कि उसमें बैठे समस्त देव, देवियां, स्त्री पुरुष, साधु आर्यिका, पशु पक्षी अपनी-अपनी भाषा में प्रवचन सुनकर महान आत्मलाभ प्राप्त करते हैं। तीर्थंकर का ज्ञान, शरीर का सौंदर्य, बल पराक्रम जन्म से ही असाधारण होते हैं।
आचार्य विशुद्ध सागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि सुप्रभ सागर महाराज, मुनि प्रणत सागर महाराज , मुनि सौम्य सागर महाराज,मुनि अनंग सागर के सान्निध्य में अतिशय क्षेत्र कारीटोरन में शुक्रवार को पंचकल्याणक महोत्सव में भगवान का ज्ञान कल्याणक श्रद्धा-आस्था पूर्वक मनाया गया। इस दौरान अभिषेक, शांतिधारा, नित्य महापूजन किया गया। शुक्रवार को 26 जिन वेदिकाओं का शिलान्यास विधि विधान के साथ किया गया। दोपहर में ज्ञान कल्याणक की आंतरिक संस्कार क्रियाओं में नयन उन्मीलन, तिलक दान, केवलज्ञान, समवशरण रचना, देव आगमन, दिव्यध्वनि खिरने की क्रियाएं विधि विधान के साथ की गई। प्रभु को केवलज्ञान प्राप्त होने पर श्रद्धालु जयकारे करने लगे। इस अवसर पर केवलज्ञान कल्याणक का पूजन किया गया। मुनिराजों ने प्रतिमाओं में सूरि मंत्र दिया। प्रतिष्ठा विधि विधान पंडित महेश जैन, पंडित अखिलेश जैन, पंडित राकेश जैन ने संपन्न कराई।
आयोजन में महोत्सव समिति के अध्यक्ष प्रकाश जैन मड़ावरा, महामंत्री अशोक कपासिया, संयोजक राजेश रज्जू, राजू सौरया, अजित खजुरिया ललितपुर, स्वागत समिति के डॉ शिखरचंद सिलोनिया, आनंदी जैन, प्रचारमंत्री डॉ सुनील संचय, प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शिखरचंद जैन, डॉ श्रेयांस जैन, डॉ विजय जैन, संतोष जैन, अनुभव कपासिया, सुरेशचंद्र, राजाराम, राजेश जैन, राकेश जैन, शीलचंद्र, माधव आदि मौजूद रहे।
मोक्ष कल्याणक आज
प्रचारमंत्री डॉ सुनील संचय ने बताया कि शनिवार को आयोजन के अंतिम दिन मोक्ष कल्याणक एवं दोपहर में श्रीजी रथयात्रा निकाली जाएगी।