- पशुपालकों का रुझान भैंस पालन की ओर बड़ा, गोवंश पालकों की संख्या में आई कमी
राष्ट्रीय दुग्ध दिवस पर विशेष
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जनपद में विगत दो वर्ष की रिपोर्ट पर नजर डालें तो जिले में दुग्ध उत्पादन में करीब आठ प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि इन दो वर्ष में गोवंश की जगह महिषवंश पशुपालकों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है।
वित्तीय वर्ष 2022-23 में दुग्ध उत्पादन 329 हजार मीट्रिक टन लीटर था, जो वर्तमान में 382 हजार मीट्रिक टन हो गया है। प्रतिवर्ष करीब आठ प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
दूध के सेवन से हमारे शरीर को कई सारे फायदे पहुंचते हैं। दूध से हमें कई सारे आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं। दूध के महत्व को समझने और इसे व्यर्थ न जाने देने के लिए इसके फायदों के प्रति जागरूक करने के लिए प्रतिवर्ष 26 नवंबर को राष्ट्रीय दुग्ध दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने की शुरुआत सन् 2001 में हुई थी।
पशुपालन की ताजा रिपोर्ट पर नजर डालें तो पिछली गणना में महिषवंश 2.91 लाख थे, जो वर्तमान में 2.96 लाख हो गए हैं। गाय से अधिक दूध भैंस देती है, यही कारण है कि महिष पालन से दुग्ध उत्पादन की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
जनपद में वर्ष बार दुग्ध उत्पादन की स्थिति
वित्तीय वर्ष - दुग्ध उत्पादन
2022-23 - 329 हजार मीट्रिक टन लीटर
2023-24 - 354 हजार मीट्रिक टन लीटर
2024-25 - 382 हजार मीट्रिक टन लीटर
जिले में गोवंश से अधिक महिषवंश का पालन हो रहा है, साथ ही दुग्ध उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान में करीब आठ प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
डॉ भगवान सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी