ललितपुर। नेहरू महाविद्यालय में ‘भारत की सामाजिक समरसता, एकता एवं सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक श्रीगणेश महोत्सव’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन पर प्राचार्य डॉ ओमप्रकाश शास्त्री ने कहा कि गणेश महोत्सव भारतीय संस्कृति की वह परंपरा है जो सदियों से समाज को जोड़ती आई है। उन्होंने गणेश जी को ‘विघ्नहर्ता’ के साथ-साथ ‘एकता के प्रतीक’ के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह उत्सव जाति, धर्म और भाषा की दीवारों को पार कर सामाजिक समरसता का संदेश देता है।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी से आए सहायक आचार्य डॉ. शैलेंद्र कुमार साहू ने कहा कि गणेश महोत्सव लोकतंत्र और जन-भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक गणेशोत्सव की परंपरा ने समाज के सभी वर्गों को एकजुट किया है और यह उत्सव सांस्कृतिक चेतना को जीवंत रखने का माध्यम बन गया है। उन्होंने वर्तमान समय में सामाजिक समरसता बनाए रखने में इस उत्सव की प्रासंगिकता पर विशेष प्रकाश डाला।
प्रबंधक प्रदीप चौबे ने कहा कि वर्तमान में भारत के भविष्य युवा पीढ़ी पर्वों एवं महोत्सवों के गूढ़ रहस्य को नहीं समझ पा रहे हैं। उन्होंने गणेश महोत्सव को भारतीय संस्कृति की सामासिक एकता का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह उत्सव न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक गर्व का भी माध्यम है। प्रबंध समिति के अध्यक्ष शरद खैरा ने कहा कि युवा पीढ़ी और छात्र-छात्राओं में संगोष्ठियों के माध्यम से सकारात्मक संदेश पहुंचाने का कार्य विद्वानों एवं शिक्षाविदों का है।
संगोष्ठी में सहायक आचार्य हिंदी हिमांश धर द्विवेदी ने गणेश महोत्सव में युवाओं की भागीदारी और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ाने में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। इतिहास के सहायक आचार्य डॉ. रामकुमार रिछारिया ने ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में गणेश उत्सव के सामाजिक महत्व को रेखांकित किया। हिंदी के सहायक आचार्य डॉ. सुधाकर उपाध्याय ने कहा कि गणेश महोत्सव भारत की सांस्कृतिक निरंतरता और सामाजिक एकता का जीवंत प्रमाण है। संस्कृत विभाग के सहायक आचार्य डाॅ. दीपक पाठक ने कहा कि श्रीगणेश महोत्सव की परंपरा भारत देश में सृष्टि के आदिकाल से चली आ रही है। श्रीगणेश महोत्सव सनातन धर्म में अंहकार से रहित होकर श्रेष्ठतम व्यक्तित्व को स्वीकार करने का संदेश प्रदान करता है।
इस मौके पर महाविद्यालय प्रबंध समिति के वरिष्ठ सदस्य रघुवीर तिवारी, प्रो.आशा साहू, प्रो.अनिल सूर्यवंशी,जितेंद्र कुमार,डाॅ. प्रदीप कुमार, डाॅ. संजीव शर्मा, डाॅ.सूबेदार यादव, डाॅ. राजेश तिवारी, डाॅ. ओपी चौधरी, डाॅ. रिचाराज सक्सेना,फहीम बख्श,कविता पैजवार सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डाॅ.दीपक पाठक ने किया।