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रसायनों के प्रयोग से भूमि की बिगड़ी सेहत

Fri, 05 Feb 2016 12:34 AM IST
ब्यूरो
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ललितपुर। रसायनिक खादों और कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल से जिले की उपजाऊ भूमि की सेहत खराब हो रही है। स्थिति यह है कि खेतों में वर्तमान में जीवांश और कार्बन का औसत लगभग 0.25 से लेकर 0.45 प्रतिशत के मध्य आंका जा रहा है, जबकि जीवांश कार्बन का प्रतिशत 0.80 होने पर ही खेती की जा सकती है।
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अर्थयुग में कृषकों ने ज्यादा फायदा लेने के चक्कर में मनमाने तरीके से रासायनिक खादों व कीटनाशकों का फसलों में प्रयोग किया, जिससे किसानों को तात्कालिक लाभ मिला। लेकिन, धीरे- धीरे खेतों का उपजाऊपन समाप्त होने लगा, स्थिति यह है कि फसलों का उत्पादन तेजी से गिरने लगा है।

इस समय मिट्टी में मुख्य तत्व व सूक्ष्म तत्वों की कमी देखी जा रही है। विशेषकर जीवांश कार्बन न्यून और फास्फेट अति न्यून हो गया है। इसके अलावा जिंक व गंधक की कमी देखी जा रही है। इसका खुलासा मिट्टी के लिए गए नमूनों की जांच से हुआ है।
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बीते महीनों में जिले के 46 ग्रामों से 2,841 मिट्टी के नमूने लिए गए थे, इसमें से 1,045 नमूनों का परीक्षण किया गया। इसमें खेतों की मिट्टी खराब पाई गई है, जिसका प्रतिकूल असर फसलों पर पड़ रहा है।

फसलों का उत्पादन अचानक गिर गया है। तमाम किसान फसलों की लागत राशि भी नहीं निकाल पा रहे हैं। परेशान किसान अब उत्पादन बढ़ाने के उपाय तलाशते नजर आ रहे हैं।  

यह हो रहा नुकसान
जीवांश कार्बन न्यून होने से भूमि की भौतिक दशा खराब हो रही है। पानी रोकने की क्षमता कम होने से भूमि सख्त हो रही है। फास्फेट की कमी से सूक्ष्म वैक्टीरिया कम हो रहे हैं, जिससे पौधों की उपज में कमी आ जाती है।

पौधे कमजोर होने लगते हैं। वैक्टीरिया ही पोषक तत्वों को घुलनशील अवस्था में लाते हैं। जिंक व गंधक की कमी से तिलहनी फसलों में तेल कम हो जाता है।

मसौरा कलां में ना के बराबर रह गए तत्व
नगर के निकटवर्ती ग्राम मसौराकलां निवासी रमू पुत्र अनंदी ने अपने खेत की मिट्टी का परीक्षण कराया है। इसमें जीवांश कार्बन व फास्फेट अति न्यूून है तो पोटाश मध्य श्रेणी में है।

इस किसान को गेहूं अथवा मक्का की फसल उगाने पर 100 कुंतल गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर, 264 किलो यूरिया, 165 किलो डीएपी व 67 किलो एनओपी के प्रयोग की सलाह दी गई है।

ऐसे सुधरेगी सेहत
परंपरागत खेती करने से बीमार मिट्टी की सेहत सुधारी जा सकती है। रसायनिक खाद की जगह गौमूत्र एवं नीम की निबौली, लहसुन, मिर्च व धतूरा से बने कीटनाशक का इस्तेेमाल किया जा सकता है। इसी तरह रसायनिक खाद की जगह गोबर खाद व वर्मी कम्पोस्ट खाद का प्रयोग कर सकते हैं।

काम आ रही उद्यान विभाग की शर्तें
स्प्रिंकलर सेट के मामले में उद्यान विभाग की शर्तें काम आ रही हैं। विभाग ने योजना में मिट्टी के नमूने की जांच को आवश्यक बना दिया है, जिससे तमाम कृषक अपने खेतों की मिट्टी के नमूने लेकर प्रयोगशाला में जांच के लिए पहुंच रहे हैं।
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