जिले के आलाधिकारियों के सिर से वीआईपी कल्चर का खुमार नहीं उतर रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा चार दिन पहले ही इस संबंध में अपील करने के बावजूद भी अफसर अपने सरकारी वाहन से नीली बत्ती नहीं हटा सके हैं। इसके लिए उन्हें शासनादेश का इंतजार है। हालांकि, एआरटीओ ने पहल करते हुए अपने वाहन से नीली बत्ती हटा ली है।
वीआईपी कल्चर को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने एक मई से सभी वाहनों से लाल बत्ती और नीली बत्ती हटाने का निर्णय लिया है। इसके लिए फायर बिग्रेड, पुलिस और एंबुलेंस को ही नीली बत्ती लगाने की छूट दी गई है। इससे पहले 21 अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी गाड़ी से लाल बत्ती हटाते हुए सभी मंत्रियों और अधिकारियों से भी बत्ती हटाने की अपील की थी। लेकिन, जनपद के अधिकारियों पर इस अपील का कोई असर नहीं हुआ और वह वीआईपी कल्चर का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। जनपद के परिवहन विभाग पर मुख्यमंत्री की अपील का असर हुआ है। एआरटीओ प्रवर्तन सोमलता यादव और एआरटीओ प्रशासन सतेंद्र सिंह ने अपने वाहन से नीली बत्ती हटा ली है। वहीं, महरौनी से विधायक और जिले से एकमात्र मंत्री मनोहर लाल पंथ पहले ही अपनी गाड़ी से लाल बत्ती उतार चुके हैं। जबकि जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, एसडीएम समेत जिले के सभी प्रमुख अधिकारियों की गाड़ियों पर नीली बत्तियां लगी हैं।
30 अप्रैल को हटाएंगे
प्रदेश सरकार की ओर से कोई शासनादेश नहीं मिला है। इस कारण नहीं हटाई गई है। 30 अप्रैल को हटानी ही है, तब हटा दी जाएगी।
- प्रवीण कुमार लाक्षाकार, मुख्य विकास अधिकारी
बत्ती हटाने का कोई आदेश नहीं मिला
शासन से इस संबंध में कोई निर्देश नहीं मिला है। इस कारण अभी गाड़ियों से बत्तियां नहीं हटाई गई हैं। जैसे ही कोई निर्देश आएगा, उसका पालन किया जाएगा।
- योगेंद्र बहादुर सिंह, एडीएम
सीएम की अपील पर अमल किया
मुख्यमंत्री की अपील पर गाड़ी से नीली बत्ती हटा ली है। कोई निर्देश आए उससे पहले ही आदेश का पालन करना उचित है।
- सोमलता यादव, एआरटीओ प्रवर्तन