प्रदेश सरकार के कार्यकाल के पांच वर्ष पूरे हो चुके हैं और नगर पालिका की वर्तमान बोर्ड का कार्यकाल भी अंतिम चरण में है, लेकिन इन वर्षों में शहर के केवल दो कब्रिस्तानों को एक-एक हाईमास्ट लाइटें ही नसीब हो पाई है। वर्तमान में शहर के चारों कब्रिस्तानों में मूलभूत सुविधाओं जैसे नमाज पढ़ने के लिए पक्के स्थल, लाइट, पानी, बैठने की व्यवस्था, पक्का मार्ग का टोटा है। स्थानीय लोगों व विभिन्न संगठनों द्वारा अनेकों बार कब्रिस्तानों के जीर्णोद्धार की मांग की गई है, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।
शहर में मुस्लिम समाज के चार कब्रिस्तान बने हुए हैं, लेकिन इनमें से एक भी कब्रिस्तान ऐसा नहीं जहां पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव न हो और बदहाल स्थिति में न हों। केवल मुहल्ला
नदीपुरा में स्थित कब्रिस्तान ऐसा है, जिसे स्थानीय लोगों ने स्वयं के ही सहयोग व खुद की देखरेख में व्यवस्थित रखा हुआ है, लेकिन यहां पर भी पानी की समस्या आड़े आ ही जाती है। शहर के अन्य कब्रिस्तानों की बात करें तो मुहल्ला घुसयाना में स्थित कब्रिस्तान में चारदीवारी तो है, लेकिन सुरक्षा के इंतजाम नहीं है। पूर्व में यहां पर प्रकाश की सुविधा के लिए लैंप लाइट लगवाई गई थी, लेेकिन वर्तमान में केवल इनके पोल की बचे हुए हैं।
बीते कुछ माह पूर्व ही नगर पालिका ने यहां पर प्रकाश की उचित व्यवस्था के लिए हाईमास्ट लाइट लगवाई है और एक अन्य हाईमास्ट लाइन इलाईट चौराहे के पास स्थित राईन कब्रिस्तान में लगवाई गई है। वहीं, कब्रिस्तानों में अंदर भी पक्के मार्गों व फुटपाथों का भी जमकर अभाव है। सबसे बुरी स्थिति इलाइट चौराहा के पास गल्ला मंडी मार्ग पर और नेहरू नगर में बने कब्रिस्तानों की है। कच्चे मार्ग पर डले कटीले व नुकीले पत्थरों के कारण यहां आने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
पानी की आती है समस्या
कब्रिस्तान में जनाजे को दफनाने के लिए एक हजार से अधिक लोग जाते हैं, इनमें से करीब डेढ़-दो सौ लोग नमाज अदा करते हैं। लेकिन बुजू करने के लिए पानी की व्यवस्था नहीं है। केवल नदीपुरा में स्थित कब्रिस्तान में नलों की सुविधा है। एक ही हैंडपंप होने के कारण लोगों को काफी परेशानी होती है।
कंटीली झाड़ियों से वीराना माहौल
रखरखाव के अभाव में शहर के चारों कब्रिस्तानों की चारदीवारी के भीतर हर जगह बड़ी-बड़ी कटीली झाड़ियां उग आई हैं, जिससे यहां का माहौल काफी वीरान नजर आता हैं। इसके अलावा किसी भी कब्रस्तान में यहां मिट्टी में आने वाले लोगों को बैठने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। इससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
सुविधा के नाम पर केवल चाहरदीवारी
मुहल्ला नेहरू नगर में बना कब्रिस्तान काफी पुराना है, लेकिन करीब सात-आठ वर्ष यहां की चारदीवारी का निर्माण कराया गया था। इस कब्रिस्तान में सुविधा के नाम पर केवल चाहरदीवारी की ही व्यवस्था है। यहां पर बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है, जिस कारण शाम होते ही यह कब्रिस्तान अंधेरे में डूब जाता है। इसके अलावा यहां मिट्टी में आने वाले लोगों को नमाज पढ़ने के लिए न तो कोई पक्के स्थान की उचित व्यवस्था है और न ही नमाज पढ़ने वाले लोगों को नमाज पढ़ने से पहले बुजू करने के लिए पानी की व्यवस्था है।
पूर्व में नगर पालिका द्वारा यहां पर पानी की व्यवस्था के लिए बोर कराए गए थे, लेकिन सुरक्षा व रखरखाव के अभाव में बोर में डाली गई पंप मशीन चोरी हो चुकी है। इसी कब्रिस्तान के सटा हुआ ही श्मशान घाट भी बना हुआ है, इसके बावजूद भी यहां तक कब्रिस्तान व श्मशान घाट पहुंचने के लिए पक्के मार्ग की कोई व्यवस्था नहीं है। लोगों को करीब एक-ढेड़ किलोमीटर तक कच्चे मार्ग के सहारे आना पढ़ता है, जिससे काफी समस्याएं होती है।