सिंचाई विभाग के अधिकारी पहुंचे मौके पर, मिट्टी की बोरियां रखवाकर फटे कुलावा को कराया गया बंद
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जामनी बांध की मुख्य नहर से निकले महरौनी रजवाहा फट गया। इससे किसानों के खेतों में पानी भर गया और सैकड़ों एकड़ जमीन पर खड़ी गेहूं की फसल डूब गई। सूचना पर सिंचाई विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और कुलावा की मरम्मत कराकर उसे सही कराया।
जामनी नदी पर निर्मित जामनी बांध जिले के सबसे पुराने बांधों में शुमार है। इस बांध से जनपद सहित मध्य प्रदेश तक के लोगों को पेयजल और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होता है। जामनी बांध से करीब 230.30 किलोमीटर लंबाई की दो मुख्य नहरें निकली हैं। इससे करीब 10297 हेक्टेयर भूमि सिंचित की जाती है। जामनी से निकली नहर से महरौनी रजवाहा है, जो करीब 25 किलोमीटर लंबा है। इससे कस्बा महरौनी सहित 12 से अधिक गांव के किसानों की तीन हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होती है।
हाल ही में रबी के सीजन में फसल सिंचाई के लिए जामनी नहर को खोला गया था। कस्बा महरौनी के पास रजवाहा का एक कुलावा फट गया। इससे निचले क्षेत्र के कई किसानों के सैकड़ों एकड़ खेतों में खड़ी फसल डूब गई। मंगलवार की सुबह जब किसानों ने अपने खेतों को जलमग्न देखा तो हड़कंप मच गया। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने मिट्टी भरी बोरियां रखकर पानी का बहाव रोका। अधिकारियों के मुताबिक, रात के समय नहर का पानी बढ़ने के कारण रजवाहा में ज्यादा पानी पहुंचा। इससे कुलावा पर मिट्टी कम होने के चलते वह फट गया। वहीं, किसानों का आरोप है कि नहरों की सिल्ट सफाई बगैर पानी छोड़ा गया। कुलावा फटने से मथुरा प्रसाद, रविंद्र सिंह, इंद्रपाल सिंह, प्रेम साहू सहित अन्य किसानों के खेतों में खड़ी फसल पानी में डूब गई। ग्रामीणों का कहना है कि महरौनी रजवाहा के कुलावा फटने का पूर्व से अंदेशा था।
वर्जन
महरौनी रजवाहा का संचालन किया जा रहा है। किसी किसान ने खेत में ज्यादा पानी लेने के लिए कुलावा को काट दिया होगा या उसे ठीक तरीके से बंद नहीं किया होगा, जिससे पानी की धार बढ़ने से यह फट गया था। कुलावा पर मिट्टी से भरी बोरियों को रखकर इसकी मरम्मत करवा दी गई है। कुलावा को खोदने के मामले की जांच की जा रही है। - भूपेश सुहेरा, अधिशासी अभियंता सिंचाई खंड