ललितपुर। प्रदेश सरकार द्वारा भले ही जनपद को 20 घंटे बिजली दी जा रही हो, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में हकीकत बिल्कुल उलट है। विद्युत विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि बिरधा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम चढ़रऊ से भौंरदा तक साढ़े तीन किमी लंबी विद्युत लाइन टूटी पड़ी है। इसकी सुध आठ महीने बाद ली गई है, जिससे ग्राम भौंरदा के ग्रामीण आठ महीने से बिना बिजली के जीवन जीने को मजबूर हैं। हालांकि, अब विभाग द्वारा नई विद्युत लाइन का स्टीमेट बनाकर काम शुरू करने की कवायद शुरू कर दी दी गई है।
बाईपास स्थित 33 केवी सब स्टेशन में स्थापित खितवांस फीडर के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों को बिजली आपूर्ति दी जाती है। प्रदेश सरकार द्वारा सूखा से त्रस्त ग्रामीण क्षेत्रों को सिंचाई के दौरान 24 घंटे और अब 20 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है।
लेकिन, विभागीय लापरवाही की हद तब हो गई, जब आठ महीने से एक गांव की विद्युत लाइन नहीं बदली जा सकी है। गत वर्ष जनपद में बारिश भले ही थोड़ी हुई हो, लेकिन आलम यह रहा कि खितवांस फीडर के अंतर्गत ग्राम चढ़रऊ से भौंरदा तक जाने वाली साढ़े तीन किमी लंबी 67 खंभों की विद्युत लाइन टूटकर पूरी तरह से ध्वस्त हो गई। बारिश के दौरान यहां शुरू में तीन, फिर पांच और आठ महीने में पूरे 67 खंभे टूटकर गिर गए। इसके चलते ग्राम भौंरदा के ग्रामीणों को आठ महीने से बिजली नहीं मिल रही है। शुरू में ग्रामीणों ने विद्युत अधिकारियों व जिला प्रशासनिक अधिकारियों को शिकायती पत्र देकर विद्युत लाइन जुड़वाने की मांग की, लेकिन विद्युत विभाग द्वारा आठ महीने तक कोई सुध नहीं ली गई। हालांकि, अब विद्युत विभाग ने 67 खंभों की यह विद्युत लाइन फिर से तैयार कराने के लिए 15.21 लाख रुपये का स्टीमेट तैैयार किया है। इसका जिम्मा विभाग द्वारा एक कार्यदाई संस्था को सौंपा गया है। ताकि, ग्राम भौंरदा तक नई विद्युत लाइन विछाकर ग्रामीणों को बिजली आपूर्ति प्रदान की जा सके।
विभागीय सूत्रों के अनुसार अब उक्त लाइन को संभवत: कल्यानपुरा फीडर से जोड़ने की कवायद की जा रही है। बताया गया है कि उक्त लाइन के निर्माण में करीब डेढ़ सप्ताह तक का समय लग सकता है। अब यह लाइन फिर से संचालित हो जाने से यहां के ग्रामीणों को आठ महीने बाद एक बार फिर से बिजली के दर्शन हो सकेंगे।