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मजदूर दिवस मनाया, लेेकिन नहीं पा सके मजदूरी

Mon, 02 May 2016 12:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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ललितपुर। पूरे देश में भले ही मजदूर दिवस पर सरकारों द्वारा बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हों, लेकिन सच्चाई कुछ और ही है। जनपद में विद्युत विभाग में ठेकेदारी प्रथा से काम कर रहे एक सैकड़ा से अधिक विद्युत संविदा कर्मियों को छह माह से मजदूरी नहीं दी गई है। इससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इसी के कारण बहुत से संविदा कर्मियों ने पूर्व घोषणा के अनुसार मजदूर दिवस पर भूखे पेट रह कर काम किया, तो बहुतों ने खाना तो खा लिया, लेकिन वह विद्युत अधिकारियों व ठेकेदारों को कोसते नजर आए, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं था।
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विद्युत विभाग में ठेकेदारी प्रथा के माध्यम से लाइनमैन व अन्य कार्यों के लिए 112 संविदा कर्मियों की तैनाती की गई है। विभागीय नियम और शर्तों के अनुसार इन कर्मियों को ठेकेदारों के माध्यम से हर माह मानदेय दिया जाना चाहिए, लेकिन शायद ही कोई महीनों ऐसा रहा हो, जब इन कर्मियों को समय से काम की मजदूरी मिली हो। वर्षों पूर्व से यह स्थिति चली आ रही है कि इन कर्मियों को पांच से छह माह तक का मानदेय नहीं दिया जाता है।

इसके चलते इन कर्मियों को आंदोलन की राह पकड़नी पड़ती है, लेकिन ठेकेदार को इन सब बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता और आंदोलन तेज होने पर अथवा कर्मियों की नाराजी दूर करने के लिए एक या दो माह की मजदूरी का झुनझुुना पकड़ा दिया जाता है। इसके बाद फिर समस्या जस की तस हो जाती है। ऐसे में इन मजदूरों की सुनने वाला कोई नहीं है, यहां तक कि जिस विभाग में यह कार्य कर रहे हैं, उस विभाग के अधिकारियों द्वारा भी ठेकेदार की मनमानी पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है, जबकि टेंडर की शर्तों में कर्मियों को हर माह मानदेय नहीं देने पर विभाग द्वारा ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड कर सकता है, लेकिन कई वर्षों से इन कर्मियों का ठेकेदारों व विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के चलते शोषण जारी है। एक मई को मजदूर दिवस पर विद्युत विभाग में काम करने वाले संविदा कर्मियों द्वारा भूखे पेट रहकर काम करने का निर्णय लिया था, जिसमें बहुत से मजदूरों ने ऐसा किया भी, लेकिन हासिल कुछ भी नहीं हुआ।
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