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अब जिले में होंगी तीन फास्ट ट्रैक कोर्ट

Tue, 23 Feb 2016 12:30 AM IST
ब्यूरो
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ललितपुर। प्रदेश शासन द्वारा हत्या, बलात्कार, डकैती, अपहरण जैसे गंभीर आपराधिक मामलों के जल्द निस्तारण और पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए अधिक से अधिक नई फास्ट ट्रैक कोर्ट का सृजन किया जा रहा है।
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उच्च न्यायालय ने जनपद में एक और फास्ट ट्रैक कोर्ट के सृजन की मंजूरी दे दी है, जिससे अब जिले में तीन फास्ट ट्रैक अदालतें हो जाएंगी। इसमें न्यायिक अधिकारी समेत सात पदों पर नियुक्ति की जाएगी।

प्रदेश शासन ने गंभीर आपराधिक प्रकृति व पांच वर्ष से अधिक समय से लंबित भूमि अधिग्रहण से संबंधित मामलों में शीघ्र न्याय करने के उद्देश्य से प्रदेश में 212 नई फास्ट ट्रैक कोर्ट का सृजन किया है। इसमें 1,696 विभिन्न पदों पर एक-एक पीठासीन अधिकारी, वैयक्तिक सहायक, रीडर, मुंसरिम, सूट क्लर्क, मिसलेनियस क्लर्क, अर्दली और चपरासी की नियुक्ति की जा रही है।
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जनपद न्यायाधीश दिनेश कुमार शर्मा को प्राप्त जानकारी के क्रम में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी आनंद कुमार दीक्षित ने बताया कि प्रदेेश शासन से प्राप्त पत्र के अनुसार उच्च न्यायालय द्वारा 30 दिसंबर 2015 के पत्रांक में आंशिक संशोधन करते हुए 14 वें वित्त आयोग की संस्तुतियों के क्रम में 212 एडीजे स्तर की फास्ट ट्रैक कोर्ट को तीन श्रेणियों में एडीजे, सिविल जज सीनियर डिवीजन और सिविल जज जूनियर डिवीजन स्तर पर खोला जा रहा है।

जनपद ललितपुर न्यायालय में एक एडीजे स्तर की फास्ट ट्रैक कोर्ट का सृजन कर गत दिवस संचालन शुरू कर दिया गया है, इसका पीठासीन अधिकारी अपर सत्र न्यायाधीश लोकेश राय को बनाया गया है। वहीं, इस संशोधन के बाद अब जनपद में सिविल जज सीनियर डिवीजन स्तर की एक और नई फास्ट ट्रैक कोर्ट का सृजन किया गया है।

उक्त न्यायालयों में विभिन्न पदों की निरंतरता नियमानुसार समय-समय पर बढ़ाई जाएगी। पूर्व में स्थापित त्वरित  न्यायालयों द्वारा विभिन्न प्रकार के गंभीर अपराधों के संबंधित वादों हत्या, बलात्कार, डकैती, अपहरण, मानव तस्करी, दहेज हत्या और वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, बच्चों, विकलांगों, एचआईवी एड्स रोगी आदि के सिविल वादों और पांच वर्ष से अधिक समय से लंबित भूमि अधिग्रहण एवं संपत्ति/किराएदारी विवाद से संबंधित सिविल वादों की सुनवाई की जा रही है।

अब एक और नई सिविल जज सीनियर डिवीजन की इस फास्ट ट्रैक का सृृजन होने से जनपद में उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित विभिन्न प्रकृति के गंभीर आपराधिक वादों का निस्तारण शीघ्र हो सकेगा। यह आदेश वित्त विभाग की सहमति से 30 दिसंबर 2015 को जारी आदेशों में संशोधन के बाद जारी किए गए हैं।
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