शहर में जहां दिन में भी स्ट्रीट लाइट जलाकर बिजली बर्बाद की जा रही है, तो दूूसरी ओर शहर के बीचोंबीच स्थित मुहल्ला आजादपुरा, रावतयान, तुवन टीला, वसुंधरा कालोनी समेत कुछ अन्य मुहल्लों में ऐसे क्षेत्र भी हैं, जहां पर स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था ही नहीं है। शहर की सीमाओं पर बसे मुहल्लों की बात करें तो मुहल्ला पिसनारी बाग, नेहरू नगर, सिद्धनपुरा, चौकाबाग, रामनगर में ऐसे कई क्षेत्र हैं, जहां की घनी आबादी है, लेकिन स्ट्रीट लाइट नहीं है। रात होते ही इन क्षेत्र अंधेरे में डूब जाते हैं।
वर्तमान में पूरे शहर में करीब स्ट्रीट लाइट के 4,320 प्रकाश बिंदू हैं। इनमें अधिकतर स्थानों पर 85 वाट वाले सीएफएल बल्ब लगे हुए हैं और करीब 400 बिंदू ऐसे हैं जहां पर 250 वाट वाली पुरानी सोडियम बल्ब लगे हैं और करीब 50 स्थानों पर ट्यूब लाइट लगी हुई हैं। जनता की सुविधा के लिए स्ट्रीट लाइट चालू करने का समय शाम छह बजे से सुबह लगभग सात बजे तक समय निर्धारित है। स्ट्रीट लाइटों को खोलने और बंद करने की जिम्मेदारी नगर पालिका की है और उसके लिए नपा की तीन कर्मचारी भी नियुक्त किए गए हैं। लेकिन कर्मचारियों द्वारा नियमित रूप से लाइटों को बंद नहीं किया जा रहा है। शहर की स्ट्रीट लाइटों को बंद करने के लिए शहर में कुल 70 मैन स्विच लगे हुए हैं, लेकिन इनमें से अनेकों स्विच ऐसे हैं, जो काम करना बंद कर चुके हैं और कई स्थानों पर लाइट को बंद व चालू करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। इस संबंध में नगर पालिका विद्युत स्टोर वरिष्ठ लिपिक दीपेंद्र कुमार बताते हैं कि नगर पालिका ने बीते दो-तीन वर्ष पूर्व विद्युत विभाग को 26 लाख रुपये का भुगतान करके शहर की स्ट्रीट लाइट को अलग से लाइन डालने और स्ट्रीट लाइट चालू-बंद करने के लिए मेन स्विच लगवाने का कार्य विद्युत विभाग को सौंपा था, लेकिन अब तक विभाग द्वारा कार्य को पूर्ण नहीं किया गया है। इस संबंध में जिला प्रशासन व विद्युत विभाग के अधिकारियों को पूर्व में पत्र भेजे गए हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
बेहिसाब हो रही बिजली की खपत
शहर में स्ट्रीट लाइट के नाम पर बिजली की कितनी खपत हो रही है, इसका नगर पालिका तो दूर खुद विद्युत विभाग के पास भी इसका हिसाब नहीं है। स्ट्रीट लाइट के लिए नगर पालिका 360 किलो वाट का विद्युत संयोजन लिए हुए है और इसके सापेक्ष न्यूनतम लगभग 10 लाख रुपये मासिक बिल भुगतान अदा करता है। स्ट्रीट लाइट में खपत होने वाली बिजली की मात्रा जांचने के लिए कहीं पर भी कोई मीटर नहीं लगा हुआ है। चौबीसों घंटे जल रही स्ट्रीट लाइटों की सबसे बड़ी वजह यही है, क्योंकि नगर पालिका को भी निश्चित बिल भुगतान करना है और विद्युत विभाग से भी इसका बिजली की खपत का हिसाब लेने वाला भी कोई नहीं है।
इस तरह की जा सकती है व्यवस्था
शहर की स्ट्रीट लाइट को व्यवस्थित करने के लिए यदि शहर में स्ट्रीट लाइटों के लिए अलग से केबल डाल दी जाए और मुहल्लों में लगे प्रत्येक ट्रांसफार्मर पर स्ट्रीट लाइटों का अलग से मीटर और मेल स्विच लगा दिया जाए तो इससे स्ट्रीट लाइट को समय से चालू व बंद किया जा सकेगा और स्ट्रीट लाइट पर होने वाली बिजली की खपत की भी जानकारी लगती रहेगी। इससे नगर पालिका पर भी दबाव रहेगा और बिजली की बेवजह होने वाली खपत पर भी रोक लग सकेगी।
स्ट्रीट लाइट को नियमित रूप से बंद व चालू करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। उपलब्ध संसाधनों के अनुसार कर्मियों द्वारा नियमित स्ट्रीट लाइट को बंद व चालू कराया जा रहा है। विभाग में बजट आने पर स्ट्रीट लाइट को व्यवस्थित करने के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे।
- राकेश कुमार
अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका ललितपुर।