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केंद्रीय दल ने जाने सूखा के हालात

Thu, 03 Dec 2015 12:17 AM IST
ब्यूरो
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महरौनी (ललितपुर)। बुधवार को केंद्रीय दल ने सूखाग्रस्त जिले के ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण किया। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर सूखे के हालातों को जाना। टीम ने माना कि वर्ष 2010 से लेकर अब तक क्षेत्र में फसलों की बर्बादी से किसानों की स्थिति काफी खराब हो गई है।
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केंद्रीय कृषि और कल्याण मंत्रालय के निदेशक डा. एमसी दिवाकर की अध्यक्षता में टीम के अन्य सदस्य प्रमुख वैज्ञानिक डा. कैलाश कुमार और राहत आयुक्त कार्यालय लखनऊ पंकज कुमार ने ग्राम समोंगर और छपरट में जाकर सूखा के हालातों के बारे में किसानों से बातचीत की। किसानों ने बताया कि अल्पवर्षा के कारण सूखे में फसलें चौपट हो गई हैं। खरीफ की फसल तो पूरी तरह से बर्बाद हो गई है।

सूखे के कारण 80 से 90 प्रतिशत खेतों में रबी फसल की बुवाई नहीं हो पा रही है। किसानों ने कहा कि यदि यही हालात रहे तो किसानों का कृषि कार्य  से मोहभंग हो जाएगा। क्षेत्र के अनेक किसान पलायन करने को विवश हैं। कृषि कार्य के लिए बैंक से लिए गए कर्ज चुकाने की स्थिति में भी किसान नहीं हैं।
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किसानों ने कहा कि उनके बैंक के कर्जे पूरी तरह से माफ कराए जाए। उन्हें फसल बीमा का लाभ दिलाया जाए, ताकि कुछ हद तक क्षति की भरपाई हो सके। साथ ही उन्होंने सिंचाई के लिए नलकूप व ट्यूबवेल चलाने के लिए 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने और मनरेगा के तहत मिलने वाले रोजगार के दिन बढ़ाए जाने की मांग की।
सर्वेक्षण कर रही टीम ने खेतों पर जाकर वास्तविकता देखी और किसानों को आश्वासन दिया कि संकट की इस घड़ी में सरकार उनकी हरसंभव मदद करेगी।

इसके बाद केंद्रीय टीम ने जिलाधिकारी डा. रूपेश कुमार से मुलाकात की और इस बात को स्वीकार किया कि  वास्तव में क्षेत्र के किसानों के हालात काफी खराब हैं। इस दौरान उप कृषि निदेशक हंसराज, जिला कृषि अधिकारी, एसडीएम सदर रमेश चंद्र, तहसीलदार महरौनी सुशील कुमार दुबे, राजस्व निरीक्षक मनोज पांडेय, लेखपाल मदनलाल मौजूद रहे।
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