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संतों के संग से मिलने वाला आनंद तो बैकुंठ में भी दुर्लभ : पं. चंद्रभूषण

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ललितपुर। कथा व्यास पं. चंद्रभूषण पाठक ने कहा कि संतों के दर्शन से मनुष्य का मंगल होता हैं। उसके जीवन में सकारात्मक आती हैं। इसलिए मनुष्य को संतों, गुरुओं के सानिध्य में सत्संग का धर्मलाभ लेना चाहिए। वह रविवार को चंडी मंदिर धाम आयोजित भगवत कथा का वर्णन कर रहे थे।
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उन्होंने कहा कि जीवन में अशांति, परेशानियां तब शुरु हो जाती हैं जब मनुष्य के जीवन में सत्संग नहीं होता। जिस उद्देश्य की पूर्ति के लिए मनुष्य को जीवन मिला था। उससे वह भटक गया है। उन्होंने कहा कि जीवन प्रभु को पाने के लिए मिला था लेकिन मनुष्य माया का दास बनकर माया की प्राप्ति के लिए इधर उधर भटकने लगता है और इस तरह मनुष्य का बहुमूल्य जीवन नष्ट हो जाता है। देवताओं के पास के पास भोग की कमी नहीं है, लेकिन फिर भी देवता मनुष्य जीवन जीना चाहते हैं। क्योंकि मनुष्य देह पाकर ही भक्ति का पूर्ण आनंद और भगवान की सेवा व हरि कृपा से सत्संग का सानिध्य मिलता है। उन्होंने कहा कि संतों के संग से मिलने वाला आनंद तो बैकुंठ में भी दुर्लभ है। इस अवसर पर चंडीपीठाधीश्वराचार्य महामंडलेश्वर स्वामी चंद्रेश्वर गिरी, हीरानंद, मुख्य यजमान डाॅ. अनूप श्रीवास्तव, डाॅ. रानी श्रीवास्तव सहित कई प्रमुख संत मौजूद रहे।
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श्रद्धालुओं ने बनाए 30 लाख पार्थिव शिवलिंग
चंडीपीठ धाम पर चल रहे सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण में रविवार को श्रद्धालुओं ने 30 लाख पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर पूजन किया। सुबह रुद्रमहायज्ञ में पीठ पूजन के साथ पार्थिव शिवलिंग निर्माण शुरू किया। दोपहर तक सैकड़ों की संख्या मेंं पहुंचे श्रद्धालुओं ने पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया। पार्थिव शिवलिंग का विधि विधान के साथ पूजन अर्चन किया गया। इस मौके पर मुख्य यजमान हरीशंकर साहू ने पीठ पूजन किया।
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भगवान शिव का सहस्त्रार्चन आज
चंडी मंदिर धाम पर सावन के अंतिम सोमवार को सुबह 11 बजे भगवान भोलेनाथ का सहस्त्रार्चन किया जाएगा। इसमें मंदिर परिसर में भगवान शिव का पार्थिव लिंग बनाकर उसका विधिवत पूजन और अभिषेक किया जाएगा। महामंडलेश्वर स्वामी चंद्रेश्वर गिरी महाराज ने बताया कि श्रद्धालु भगवान शिव का 1100 कलश के जल से अभिषेक कर 1100 कमल पुष्प,1100 बेलपत्री, गंगाजल समेत अन्य सामग्री से पूजन करेंगे।
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सम्मेलन में संत का आना शुरू
चंडीपीठ प्रांगण में भगवान शिव का सहस्रार्चन बाद अपराह्न दो बजे से संत सम्मेलन शुरू होगा। इस सम्मेलन में पंजाब के लुधियाना स्थित सिद्धपीठ ठाकुर की ओर से पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर महंत रामेश्वर दास त्यागी, जालंधर से महामंडलेश्वर आदित्यगिरी, काशी थाना पति पंचायती अखाड़ा से विवेक भारती, निरंजन अखाड़ा से महंत हरीशपुरी, वाराणसी के अन्नपूर्णा मठ से गौरव भारती सहित कई प्रमुख संत आ गए हैं। आयोजक महामंडलेश्वर स्वामी चंद्रेश्वर गिरी ने रविवार को संत सम्मेलन को लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया।
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