ललितपुर। देवगढ़ में मधुमक्खियों के हमले में अधिकारियों के जख्मी होने की सूचना जैसे ही जिला प्रशासन को लगी, जनपद मुख्यालय से बचाव के लिए टीमें रवाना हो गईं। लेकिन, सुगम रास्ता न होने के कारण वहां तक पैदल जाने में करीब एक घंटे का समय लगा। चारपाई की मदद से सीडीओ को पहाड़ी के रास्ते पहले ट्रैक्टर-ट्राली तक लाया गया। इसके बाद उन्हें एंबुलेंस तक पहुंचाया गया। सुबह 10 बजे यह घटना हुई थी, लेकिन मेडिकल कॉलेज तक लाने में दोपहर के एक बज गए।
देवगढ़ में बौद्ध गुफाओं तक जाने के लिए जंगल में काफी दूरी पर वाहन खड़े करने होते हैं। इसके बाद पहाड़ से नीचे उतरकर जाना होता है। यह पर्यटन स्थल घने जंगल में मौजूद है। इस दुर्गम वनक्षेत्र में मौजूद पर्यटन स्थलों तक पहुंच मार्ग के लिए जिला प्रशासन ने कार्ययोजना तैयार की थी, लेकिन वन विभाग ने मार्ग बनने में व्यवधान उत्पन्न किया, जिससे रास्ता नहीं बन पाया। इसी कारण राहत टीम जल्द वहां नहीं पहुंच पाई।
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ग्रामीणों व वन विभाग की मदद से बचा बड़ा हादसा
मधुमक्खियां जब हमलावर होती हैं तो वह इंसान को नहीं छोड़तीं। इस घटना में जैसे ही हादसे की सूचना मिली, समीप से वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। उनके साथ ग्रामीण भी कंबल आदि लेकर पहुंचे। उन्होंने तत्काल कंबल से लोगों को सुरक्षित किया। कंबल में उनका डंक प्रभावी नहीं होता।
एडीएम व सीडीओ को हजारों डंक
एडीएम नमामि गंगे राजेश श्रीवास्तव के चेहरा, पेट, हाथ व सिर में मधुमक्खियों के डंक लगे। साथ ही उनके कान तक से मधुमक्खियों के डंक निकाले गए। वहीं, सीडीओ कमलाकांत पांडे के भी चेहरे, पेट, हाथ व सिर में कई डंक लगे थे। पूरा शरीर दोनों अधिकारियों का छेद दिया था।
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डीएम ने स्वयं संभाला मोर्चा
जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी की सजगता के कारण घायलों को समय पर इलाज मिल सका। उन्होंने सूचना मिलते ही तत्काल अधिकारियों को मौके पर कंबल व अन्य राहत सामग्री के साथ रवाना किया। एंबुलेंस व चिकित्सकों को भी भेजा। उन्होंने मेडिकल कॉलेज पहुंचकर प्रभारी प्रधानाचार्य, मेडिकल स्टॉफ की तैयारियों का जायजा लिया। राहत कार्य में अपर जिलाधिकारी अंकुर श्रीवास्तव, उपजिलाधिकारी चंद्रभूषण प्रताप सिंह, डीडीओ अतिरंजन सिंह, डीपीआरओ नवीन मिश्रा का भी योगदान रहा।