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तप से आत्मा होती है निर्मल : आचार्य

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ललितपुर। संत आचार्य निर्भय सागर महाराज ने कहा कि तपाने से जैसे अशुद्ध वस्तु शुद्ध होती है, उसी तरह आत्मा को तप के माध्यम से जब तपाते हैं तो जीवन में निखार एवं परिणामों में निर्मलता आती है। वह पर्यूषण पर्व पर पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अटा मंदिर में धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।
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आचार्यश्री ने कहा कि इच्छाओं का निरोध भी तप है। किसी तपस्वी की जब छवि देखते हैं तो उसके प्रति श्रद्धा अपने आप होती है। ध्यान और स्वाध्याय द्वारा इंद्रिय विषयों और कषायों का निग्रह कर तप होता है। उन्होंने कहा कि इंद्रिय विषयों पर विजय को जीतना ही सच्ची साधना है। तप के माध्यम से आत्मा निर्मल होती है और शांति की अनुभूति होती है।
धर्म सभा का शुभारंभ आचार्य विद्यासागर महाराज, आचार्य अभिनंदन सागर महाराज, आचार्य विपुल सागर महाराज के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर श्रेष्ठीजनों ने किया। आचार्य श्री ने ध्यान के माध्यम से जीवन में धर्म और साधना से जुड़ने की सीख दी। अभिनंदनोदय तीर्थ में मुनि सुदक्त सागर महाराज एवं मुनि पदमदत्त सागर महाराज के सानिध्य में धावकों ने अभिषेक शांतिधारा की। उन्होंने कहा कि उत्तम तप शरीर को संगत करते हुए मन में उठी इच्छाओं का निरोध करना है।
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नृत्यनाटिका का किया मंचन : नगर के प्रमुख मंदिर अभिनंदनोयय तीर्थ, जैन अटामंदिर, आदिनाथ बड़ा मंदिर, पार्श्वनाथ नया मंदिर, आदिनाथ मंदिर गांधीनगर, चंद्रप्रभु मंदिर डोडाघाट, शांतिनगर मंदिर गांधीनगर इलाइट जैन मंदिर, सिविल लाइन, बाहुबलिनगर पार्श्वनाथ कॉलोनी एम्ब्रोशिया कॉलोनी में श्रद्धालु वंदना कर रहे हैं। सायंकाल अभिनंदनोदय तीर्थ में सुधाकलश महिला मंडल ने आचार्य श्री के जीवन पर आधारित नृत्यनाटिका पेश की। पार्श्वनाथ जैन अटामंदिर में अंताक्षरी प्रतियोगिता हुई, जिसमें प्रतिभागियों ने पुरस्कार प्राप्त किए।
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तपस्या करने से होती कर्मों की निर्जरा : गुरुदत्त सागर
महरौनी। मुनि गुरुदत्त सागर ने कहा कि तप का अर्थ इच्छाओं पर नियंत्रण रखकर शरीर, वाणी और मन को अनुशासित करते हुए आत्मा को शुद्ध करना है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति तपस्या करता है, उसका मुख्य उद्देश्य आत्मा पर लगे कर्म रूपी मैल की निर्जरा करना होता है। वह अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे दशलक्षण महापर्व पर प्रवचन दे रहे थे। मुनि मेघदत्त सागर ने कहा कि इच्छाओं का निरोध ही तप कहलाता है। लेकिन जब तप सम्यक दर्शन और श्रद्धा के साथ किया जाता है, तब वह उत्तम तप बनता है। संवाद
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वर्णी नगर में बही धर्म की गंगा
मड़ावरा। ब्रह्मचारिणी बहन कल्पना के सानिध्य में दसलक्षण पर्व में संगीतमय पूजन प्रवचन माला हो रही है। सुबह की शांतिधारा अभिषेक जैन, मिशन जैन एवं अभिषेक, दिनेश बजाज ने की। सुधीर विनीता सिंघई को श्रीफल चढ़ाने का सौभाग्य मिला। श्री चंद्रप्रभु पाठशाला के बच्चों ने ममता जैन, रूबी जैन, मंजू जैन के निर्देशन में सांस्कृतिक कार्यक्रम मंगलाचरण एवं कव्वाली प्रस्तुत की।
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