संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। गर्मी में पीने के पानी की तलाश में जानवर आबादी वाले इलाकों में न आ जाएं, इसके लिए निरंतर जलस्रोतों पर कर्मचारी नजर बनाए हैं। जंगलों में स्थित तालाब व बावड़ी में पानी की स्थिति अभी सही है। नदियों व नालों में भी पानी मौजूद है। जंगल में निर्मित हौजों में टैंकरों के माध्यम से पानी भरवाया जा रहा है। मड़ावरा, गौना और ललितपुर तीनों रेंज में हिंसक पशु हैं।
जंगलों में भालू व तेंदुआ के अलावा कई और हिंसक पशु तो हैं ही, हिरन की भी कई प्रजातियां हैं। गर्मी के मौसम में पानी की तलाश में यह जंगली पशु आबादी वाले इलाकों में आ जाते हैं। रास्ते में लोगों पर यह हमला भी कर देते हैं। अन्य साधारण पशुओं को शिकारियों से भी बचना होता है। इन सभी समस्याओं से जानवरों व लोगों को बचाने के लिए वन विभाग जंगलों में विशेष ध्यान दे रहा है। विभाग वन क्षेत्र में बने हौजों को टैंकरों से भरवा रहा है।
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जंगलों में यह हैं प्रमुख जलस्रोत
जंगलों में जानवरों को पानी पीने के लिए तालाब, नाले, नदी व बावड़ी बनी हैं। यहां ललितपुर, गौना व मड़ावरा रेंज में हिंसक पशु हैं। ललितपुर रेंज में बेतवा व मड़ावरा रेंज में धसान नदी बहती है। इसके अलावा शहजाद व जामनी नदी व उनके सहायक नाले भी पशुओं की प्यास बुझाते हैं।
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वन्य जीवों की स्थिति
प्रजाति का नाम- नर - मादा - बच्चे - योग
तेंदुआ - 07 - 07 - 08 - 22
फिशिंग कैट - 04 - 04 - 02 - 10
चिंकारा - 80 - 92 - 71 - 243
चौसिंघा - 25 - 32 - 25 - 82
वनरोज -6412 -6155 -2860 -15427
सांभर - 59 - 71 - 54 -184
चीतल - 213 - 221 -195 -629
बारसिंघा - 14 - 28 - 26 -68
भालू - 116 - 139 - 63 - 318
जंगलों में प्राकृतिक जल स्रोतों की निरंतर निगरानी की जा रही है। जंगल में स्थित हौजों को टैंकरों से भरवाया जा रहा है, जिससे जानवर पानी की तलाश में आबादी वाले इलाकों में न आएं।-गौतम सिंह, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी।