ललितपुर। परिषदीय स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक होने के बाद भी उर्दू का छात्रांकन नीचे गिर गया है। इस साल विद्यालयों में उर्दू के लिए एक भी बच्चे का नामांकन नहीं हो सका है। ऐसी स्थिति में उर्दू शिक्षक सामान्य शिक्षण करने को विवश हैं।
प्रदेेश में हिंदी के साथ उर्दू भाषा को खासा बढ़ावा दिया जा रहा है। परिषदीय विद्यालयों में तो उर्दू की पढ़ाई करने वाले बच्चों के लिए उर्दू भाषा के शिक्षकों की तैनाती की गई है। इसमें वर्ष 1994 में सात, वर्ष 1995 में 48 और वर्ष 2013 में 26 उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। इसके बाद भी परिषदीय स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों का उर्दू भाषा से मोह भंग हो गया है। गत शैक्षिक सत्र में 123 बच्चे परिषदीय स्कूलों में नामांकित थे, पर वर्तमान शैक्षिक सत्र में एक भी बच्चे ने उर्दू पढ़ने की इच्छा जाहिर नहीं की है। यही वजह है कि विभाग ने नि:शुल्क पुस्तकों में उर्दू की किताब एक भी नहीं मंगाई है। इस स्थिति में उर्दू शिक्षक सामान्य शिक्षण कार्य करने को मजबूर हैं।
इन कक्षाओं में था नामांकन
गत शैक्षिक सत्र में कक्षा एक में 15, दो में 18, तीन में 19, चार में 14, पांच में 15, छह में 12, सात में 17, आठ में 13 बच्चे नामांकित थे। वर्तमान सत्र में संख्या शून्य हो गई है।
अंग्रेजी भाषा में बढ़ रहा रुझान
बेसिक शिक्षा परिषद ने इस साल से अंग्रेेजी माध्यम से दो प्राथमिक स्कूल प्रारंभ किए हैं, इनमें अच्छी खासी संख्या में बच्चों ने नामांकन कराया है।
उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति पर ग्रहण
प्रदेश सरकार उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति की तैयारी में है। बीते माहों में शासन ने उर्दू शिक्षकों की तैनाती के संबंध में ब्योरा तलब किया था, पर वर्तमान हालात जिले में उर्दू शिक्षकों के हित में नहीं हैं।
कई सवाल हुए खड़े
उर्दू पढ़ने वाले बच्चों की संख्या में अचानक गिरावट आने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। या तो परिषदीय स्कूलों में उर्दू भाषा की पढ़ाई का माहौल नहीं है या फिर उर्दू शिक्षक इस भाषा पर मजबूत पकड़ नहीं रखते। शायद यही वजह है कि जिले में अभिभावक अपने बच्चों को उर्दू की पढ़ाई कराना मुनासिब नहीं समझ रहे हैं।