संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। बुंदेलखंड की ऐतिहासिक विरासत और प्राचीन धरोहरों को नई पीढ़ी से जोड़ने की पहल शुरू होने जा रही है। पुरातत्व विभाग, पर्यटन विभाग और इंटैक के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाली दो दिवसीय कार्यशाला में 200 छात्र-छात्राओं को ब्राह्मी समेत प्राचीन लिपियों, ऐतिहासिक स्मारकों और उनके संरक्षण के महत्व से परिचित कराया जाएगा। साथ ही बुंदेलखंड में पर्यटन विकास की संभावनाओं और उससे जुड़े अवसरों पर भी विशेषज्ञ व्याख्यान देंगे।
कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। कार्यक्रम में पुरातत्व और पर्यटन क्षेत्र के विशेषज्ञ प्राचीन स्मारकों, शिलालेखों तथा लिपियों के इतिहास और महत्व पर प्रकाश डालेंगे। विद्यार्थियों को यह भी बताया जाएगा कि विरासत संरक्षण में समाज और युवाओं की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। पुरातत्व विभाग और पर्यटन विभाग की ओर से जिले के लगभग 200 छात्र-छात्राओं को कार्यशाला से जोड़ा जाएगा। पर्यटन विशेषज्ञ बुंदेलखंड में पर्यटन की अपार संभावनाओं और उन्हें विकसित करने के उपायों पर चर्चा करेंगे। वहीं, विरासत संरक्षण से जुड़े जानकार विद्यार्थियों को क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहरों और उनसे जुड़े रोचक तथ्यों से अवगत कराएंगे।
इंटैक चैप्टर के संयोजक संतोष शर्मा ने बताया कि यह कार्यशाला प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है। इस बार इसका मुख्य विषय ब्राह्मी लिपि एवं अन्य प्राचीन लिपियों का अध्ययन, महत्व और संरक्षण रखा गया है। कार्यशाला के इस माह के अंत में आयोजित होने की संभावना है।
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बुंदेलखंड के प्राचीन स्मारकों और पर्यटन विकास की संभावनाओं को लेकर कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इसमें 200 छात्र-छात्राओं को विशेषज्ञों के व्याख्यान सुनने का अवसर मिलेगा। पुरातत्व विभाग, पर्यटन विभाग और इंटैक के संयुक्त प्रयास से विद्यार्थियों को धरोहर संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा।
— राजीव त्रिवेदी, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी, झांसी