संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। 51 वर्ष पहले ललितपुर के जिला बनने के समय खेती का दायरा काफी सीमित था, लेकिन आधुनिक संसाधनों ने इसमें उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। अब लगभग साढ़े तीन लाख हेक्टेयर में खेती हो रही है। पहले जहां किसान गेहूं, चना और जौ की खेती तक ही सीमित थे, अब दलहनी व तिलहनी फसलों की ओर भी अग्रसर हैं।
ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, थ्रेसर, बोआई की मशीनें, ट्रॉली आदि का चलन तेजी से बढ़ने से फसलों के उत्पादन में वृद्धि हुई। इस वर्ष लगभग तीन लाख 40 हजार हेक्टेयर में रबी की फसल की बोआई हुई है। खरीफ की फसल का आंकड़ा देखा जाए तो दस वर्ष पहले जहां 1,89,402 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खेती होती थी, वहीं पिछले वर्ष 2,87,050 हेक्टेयर में खरीफ की खेती की गई।
रबी की फसलों में दस वर्ष पहले 2,90,713 हेक्टेयर से बढ़कर पिछले वर्ष तक 3,40,609 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खेती की गई। जनपद में इस वर्ष रबी की बोआई के लिए तीन लाख 51 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। गेहूं की बोआई एक लाख 98 हजार 62 हेक्टेयर, जौ सात हजार चालीस और मक्का सहित कुल दो लाख पांच हजार 104 हेक्टेयर जमीन में बोआई का लक्ष्य रखा गया था।
चना के लिए 17 हजार 279 हेक्टेयर, मटर के लिए 79 हजार 616 हेक्टेयर, मसूर के लिए 24 हजार 718 हेक्टेयर यानि कुल दलहनों की बोआई का लक्ष्य एक लाख 21 हजार 616 हेक्टेयर निर्धारित किया गया है। तिलहन में राई व सरसों 24 हजार 97 हेक्टेयर और तोरिया की फसल की बोआई का लक्ष्य रखा गया था। रबी की फसल के लिए बोआई का काम निर्धारित लक्ष्य तीन लाख 51 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल के मुकाबले लगभग 99 फीसदी तक पूरा हो गया है। कृषि विभाग के अनुसार इस बार तीन लाख पचास हजार हेक्टेयर भूमि पर बोआई होने का अनुमान है।
सिंचाई के संसाधनों में हुई वृद्धि
नहरों के अलावा 322 सरकारी और 78,665 ट्यूबवेल से किसान सिंचाई कर रहे हैं। जबकि 63,424 कुओं और 34,434 तालाब एवं 35 अन्य स्रोतों से खेतों की सिंचाई की जा रही है। साथ ही अब तक पीएम कुसुम योजना के अंतर्गत 929 सोलर पंपों की स्थापना खेतों में कराई जा चुकी है। जबकि, यूपीनेडा के माध्यम से भी अब तक 129 लक्ष्य के सापेक्ष 55 सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। यूपीनेडा को इस वर्ष भी पीएम कुसुम सी-1 योजना में ऑनग्रिड नलकूपों के लिए 200 नए सोलर संयंत्र लगाने का लक्ष्य मिला है। इसके लिए अब तक 136 आवेदन भी आ चुके हैं।
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खेती के संसाधन काफी बढ़े हैं। जैविक खेती की ओर किसानों का ज्यादा रुख है। इस वर्ष नमी अच्छी रहने से लगभग साढ़े तीन लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में रबी की फसल की बोआई हुई है।
-बसंत कुमार दुबे, उपकृषि निदेशक।