देवी की प्रतिमाएं तैयार करते कलाकार
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर। नवदुर्गा महोत्सव का पर्व नजदीक आ रहा है और मूर्तिकार देवी पंडालों के लिए मूर्तियां बना रहे हैं। लेकिन, इस बार स्थानीय कलाकारों द्वारा सीमित संख्या में ही देवी प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं, ताकि शासन की गाइड लाइन के तहस यदि सार्वजनिक स्थानों पर दुर्गा पंडालों में प्रतिमाएं स्थापित नहीं होती हैं, तो मूर्तिकारों को अधिक नुकसान नहीं झेलना पड़े। ऐसे में मूर्तिकारों को प्रतिमा बनाने के कारोबार में नुकसान का डर भी सता रहा है। वहीं इस बार कलकत्ता के मूर्तिकारों ने भी मूर्तियां बनाने में कोई खास रुचि नहीं दिखाई है। जबकि, पिछले वर्ष शहर में ही बाहरी मूर्तिकारों ने चार सौ से अधिक आकर्षक प्रतिमाएं बनाई थी।
कोरोना काल के दौरान इस बार नवरात्रि का पर्व दुर्गा महोत्सव 17 अक्टूबर दिन शनिवार से शुरू हो रहा है, लेकिन नवदुर्गा पंडालों और देवी प्रतिमाओं की स्थापना को शासन प्रशासन द्वारा स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। इसके चलते समितियां भी असमंजस में हैं। जिसके चलते इस बार बाहरी मूर्तिकारों द्वारा भी शहर में कोई भी मूर्तियां बनाने में रुचि नहीं दिखाई है और न ही कोई देवी प्रतिमाएं बनाई हैं। हालांकि पुस्तैनी कारोबार से जुड़े स्थानीय मूर्तिकारों ने शासन द्वारा नवरात्रि तक स्थिति सामान्य होने की संभावना पर दो माह पहले से ही सीमित संख्या में दुर्गा पंडालों के लिए देवी प्रतिमाएं बनाना शुरू कर दिया था, ताकि यदि शासन द्वारा जारी गाइड में दुर्गा पंडालों की स्थापना का निर्देश मिलता है तो उनका पुस्तैनी कारोबार भी हो सकेगा और दुर्गा पंडालों में देवी प्रतिमाओं की स्थापना भी हो सके। इसी मंशा के साथ कुछ स्थानीय कलाकारों द्वारा मोहल्ला खिरकापुरा, लक्ष्मीपुरा, इलाइटके पास आदि स्थानों पर देवी प्रतिमाएं सीमित संख्या में बनाई जा रही हैं। मोहल्ला खिरकापुरा निवासी मूर्तिकार हरचरन प्रजापति ने बताया कि वह देवी प्रतिमाएं बनाने का काम बीते पंद्रह वर्ष से कर रहे हैं। पहले वह अधिक मूर्तियां बना लेते थे, तब शहर के साथ ही गांव में भी दुर्गा पंडाल समिति वाले देवी प्रतिमाएं ऑर्डर पर बनवा लेते थे और कुद प्रतिमाएं बाद भी ले जाते थे। लेकिन इस बार पहले से किसी का ऑर्डर नहीं आया है। इसके चलते इस बार करीब पंद्रह से बीस देवी प्रतिमाएं बना रहे हैं। प्रतिमाएं बनकर तैयार हैं, अभी उनकी रंगाई, सजाई का काम चल रहा है। इसमें उनके परिवार का भी पूरा सहयोग मिलता है। पूरे मोहल्ले में वह अकेले ही मूूर्तियां बना रहे हैं। जबकि लक्ष्मीपुरा में भी एक मूर्तिकार द्वारा देवी प्रतिमाएं बनाई जा रही है।
जबलपुर से मंगाते कलकत्ता का सामान और दूधिया मिट्टी
मूर्तिकार हरचरन ने बताया कि वह देवी प्रतिमाएं बनाने के लिए जबलपुर से कलकत्ता का सामान और दूधिया मिट्टी मंगाते हैं। इस दूधिया मिट्टी से ही देवी प्रतिमाओं के चेहरे व हाथों की सफाई आती है। जबकि कुछ मिट्टी का उपयोग वह स्थानीय स्तर पर भी करते हैं, जो नदी, पोखरों के किनारे से लाते हैं।
कलाकार हरचरन प्रजापति- फोटो : LALITPUR